
कोलकाता मेट्रो की पटरियों पर बढ़ता संकट: एक साल में सामने आए आत्महत्या के 14 मामले
महानगर की जीवनरेखा कही जाने वाली कोलकाता मेट्रो पिछले एक साल में यातायात की सुविधा के साथ साथ एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट की गवाह भी बनी है। 8 अगस्त 2025 से 8 अगस्त 2026 के बीच सार्वजनिक रूप से सत्यापित सूचनाओं को जोड़ने पर कम-से-कम 14 आत्महत्या अथवा आत्महत्या के प्रयास सामने आए। इनमें अधिकांश घटनाएं ब्लू लाइन पर हुईं। हालांकि मेट्रो रेलवे ने इस पूरे एक साल का समेकित आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए 14 का आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्टों और मेट्रो के आधिकारिक बयानों से तैयार न्यूनतम सत्यापित संख्या है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन घटनाओं को केवल 'मेट्रो में सेवा बाधित होने' की खबर मानना समस्या को छोटा कर देगा। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य तीनों का प्रश्न है।
सबसे चिंताजनक दौर नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नवंबर में तीन, दिसंबर में दो, जनवरी में तीन और फरवरी के शुरुआती दिनों में दो आत्महत्या के प्रयास हुए। यानी करीब तीन महीने में 10 लोग पटरियों पर कूदे और इनमें अधिकांश को बचाया नहीं जा सका। नवंबर का सिलसिला विशेष रूप से असामान्य था। 20 नवंबर को नेताजी स्टेशन पर एक प्रयास के बाद सेवाएं प्रभावित हुईं। 22 नवंबर को महात्मा गांधी रोड स्टेशन पर दूसरा प्रयास हुआ और 25 नवंबर को दमदम स्टेशन पर तीसरी घटना हुई। इन घटनाओं ने एक सप्ताह के भीतर तीन बार ब्लू लाइन की सेवाओं को बाधित किया। 25 नवंबर की घटना में करीब 40 मिनट तक परिचालन प्रभावित रहा। 29 दिसंबर को मैदान स्टेशन पर एक यात्री के पटरियों पर कूदने के बाद ब्लू लाइन का परिचालन प्रभावित हुआ। जनवरी में नेताजी भवन स्टेशन पर शाम के व्यस्त समय में आत्महत्या के प्रयास से करीब 50 मिनट तक सेवा प्रभावित होने की सूचना सामने आई। फरवरी में रवींद्र सरोवर स्टेशन पर चार दिन के भीतर दो प्रयास हुए।
5 फरवरी की घटना के बाद सेवा प्रभावित हुई और 8 फरवरी को इसी स्टेशन पर दूसरी घटना के कारण लगभग 50 मिनट तक परिचालन बाधित रहा। फरवरी के बाद घटनाओं की रफ्तार कम जरूर दिखी, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई। 4 अप्रेल को कालीघाट स्टेशन पर आत्महत्या प्रयास के कारण उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर पर करीब 20 मिनट तक सेवा प्रभावित हुई। 6 अप्रेल को महात्मा गांधी मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या प्रयास के कारण 30 मिनट तक सेवा प्रभावित हुई। 18 मई को रवींद्र सरोवर स्टेशन पर एक और प्रयास के कारण ब्लू लाइन की सेवा करीब एक घंटे तक बाधित होने की जानकारी दी गई। इसके अगले ही दिन मास्टर दा सूर्य सेन मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या के प्रयास के मामले में लगभग एक घंटे परिचालन प्रभावित रहा। 27 जून को कालीघाट स्टेशन पर एक व्यक्ति के पटरियों पर कूदने के बाद सेवा करीब 25 मिनट तक सीमित रही, हालांकि उसे मेट्रो कर्मचारियों और आपात दल ने बचा लिया। 7 अगस्त को रवींद्र सरोवर स्टेशन पर फिर आत्महत्या के प्रयास की खबर ने इस समस्या को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
इन घटनाओं का भौगोलिक पैटर्न भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों में रवींद्र सरोवर, नेताजी भवन, महात्मा गांधी रोड, दमदम, कालीघाट और मैदान जैसे ब्लू लाइन के स्टेशन बार-बार सामने आते हैं। इसके विपरीत नई ग्रीन लाइन के सभी 12 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर लगाए गए हैं। लोकसभा में फरवरी 2026 में रेल मंत्रालय ने बताया था कि कोलकाता मेट्रो में पूर्ण ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और आधी ऊंचाई वाले स्क्रीन गेट परियोजना की योजना में शामिल हैं। कालीघाट स्टेशन पर अवरोधक व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट भी किया गया है।
कोलकाता के मामले में उपलब्ध आंकड़े दोहरी चुनौती की ओर इशारा करते हैं। पहला, पुराने ब्लू लाइन स्टेशनों पर भौतिक सुरक्षा अवरोधों की कमी और दूसरा, संकट में फंसे यात्रियों की समय रहते पहचान और मानसिक स्वास्थ्य सहायता। 8 फरवरी 2026 को मेट्रो ने इसी पृष्ठभूमि में ब्लू लाइन के स्टेशनों पर आत्महत्या रोकने के लिए ऑडियो संदेश प्रसारित करना शुरू किया। संदेश में संकट की स्थिति में 24 घंटे उपलब्ध काउंसलरों से संपर्क करने की अपील की गई। मेट्रो ने ऑडियो संदेश, पोस्टर, डिजिटल डिस्प्ले, काउंसलिंग और एंटी-सुसाइड कैंप जैसी पहल शुरू की हैं। तकनीकी स्तर पर आपात संचार व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। जानकारों का कहना है कि, केवल घटना के बाद बिजली काटना और परिचालन बहाल करना पर्याप्त नहीं होगा। प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षित कर्मियों की मौजूदगी, त्वरित जोखिम-पहचान, काउंसलिंग की सहज उपलब्धता और चरणबद्ध तरीके से भौतिक सुरक्षा अवरोध बढ़ाना अधिक व्यापक समाधान का हिस्सा होना चाहिए। हालांकि, इस मामले में कोलकाता मेट्रो प्रशासन से भी बात करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
उपलब्ध घटनाओं से किसी व्यक्ति की मानसिक बीमारी का निदान करना संभव नहीं है और ऐसा करना चिकित्सकीय रूप से भी उचित नहीं होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आत्मघाती व्यवहार किसी एक कारण का परिणाम नहीं होता। अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ-साथ अचानक पैदा हुआ भावनात्मक संकट, रिश्तों में तनाव, आर्थिक परेशानी, अकेलापन, हिंसा, बीमारी और सामाजिक परिस्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। कई घटनाएं आवेग के क्षण में भी हो सकती हैं।
कुणाल दत्ता, मनोवैज्ञानिक
Updated on:
09 Aug 2026 03:08 pm
Published on:
09 Aug 2026 03:07 pm
