73वें राजस्थान दिवस समारोह में बोले वक्ता, बंगाल-राजस्थान का संबंध काफी पुराना, गणेशचंद्र एवेन्यू स्थित राजस्थान सूचना केन्द्र में 15 साल बाद आयोजन
BENGAL NEWS-कोलकाता। जयपुर राजस्थान की लेकिन कोलकाता ही राजस्थानियों की राजधानी है। बंगाल और राजस्थान का संबंध काफी पुराना है। गणेशचंद्र एवेन्यू स्थित राजस्थान सूचना केन्द्र में 73वें राजस्थान दिवस समारोह के दौरान बुधवार को वक्ताओं ने यह बात कही। गणेशचंद्र एवेन्यू स्थित कॉमर्स हाउस के राजस्थान सूचना केन्द्र में 15 साल बाद कोई आयोजन हुआ। बतौर मुख्य अतिथि जाने-माने पर्यटन विशेषज्ञ भरतपुर राजपरिवार के राजसिंह ऑफ भरतपुर समेत विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इसमें शिरकत की। उद्योगपति, समाजसेवी गंगा मिशन के सचिव प्रह्लादराय गोयनका ने अध्यक्षता की। मुख्य वक्ता राजस्थानी भाषा के साहित्यकार रतनशाह थे।समारोह की विशेषता विशिष्ट अतिथि अमेरिका के फ्लोरिडा से आई एशिया डेस्टीनेशन स्पेशलिस्ट ईवा कोवालस्की थीं। इनके अलावा राजस्थान के महाकवि कन्हैयालाल सेठिया के पुत्र जेपी सेठिया, राजस्थान परिषद के महामंत्री अरूण प्रकाश मल्लावत, संदीप गर्ग, जगदीश हर्ष, विजय शर्मा, नेहा चटर्जी आदि मौजूद थे। सूचना-जनसंपर्क विभाग राजस्थान सरकार के राजस्थान सूचना केन्द्र कोलकाता के सहायक निदेशक हिंगलाज दान रतनू ने संचालन के साथ स्वागत भाषण दिया।
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बिना राजस्थानी भाषा के राजस्थान का महत्व नहीं
मुख्य वक्ता रतनशाह ने कहा कि भाषा को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। बिना राजस्थानी भाषा के राजस्थान का कोई महत्व नहीं। शौर्य, स्वाभिमान, बलिदान, वीरांगनाओं की ऐतिहासिक धरती राजस्थान की अद्वितीय विरासत, गौरवशाली इतिहास समेत समृद्ध संस्कृति से विश्व में अलग पहचान है। चाहे कारगिल की जंग हो या भारत-पाक का युद्ध देश में सबसे ज्यादा बलिदान राजस्थान ने ही दिए। शूरवीरों की धरती और राजे-रजवाड़ों की शान के लिए संपूर्ण विश्व में राजस्थान मशहूर है।
राजस्थान-बंगाल की संस्कृति की जड़ें काफी गहरी
गोयनका ने कहा कि स्वामी विवेकानंद को केसरिया पगड़ी राजस्थान ने ही पहनाई थी। राजस्थान और बंगालकी संस्कृति की जड़ें काफी गहरी हैं। विजय शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।