अभिषेक ने कहा कि जो संस्था संवैधानिक होनी चाहिए थी, उसे ‘निर्यातन कमीशन’ में बदल दिया गया है। दिल्ली की सेवा में संवैधानिक, नैतिक और लोकतांत्रिक सीमाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। जीवित नागरिकों को परेशान किया जा रहा है, मतदाताओं को “मृत” बताया जा रहा है और बंगालियों को अपनी ही भूमि में संदिग्ध की तरह देखा जा रहा है। अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया गया कि जिन लोगों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए कभी संघर्ष नहीं किया और जो ब्रिटिश संरक्षण में फले-फूले, उन्हें यह अधिकार नहीं है कि वे तय करें कि इस राष्ट्र का हिस्सा कौन है और कौन नहीं। अभिषेक ने कहा कि बंगाल की जनता एकजुट और सतर्क है, साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से उन्हें पराजित करने के लिए तैयार है।