इस बार कहां जाएं? आखिर बार-बार हमें मेट्रो के निर्माणाधीन टनल के चलते मुसीबतों का सामना क्यों करना पड़े? मदनदत्ता लेन निवासियों ने पूछा
BENGAL EAST WEST METRO PROJECT---कोलकाता (शिशिर शरण राही)। आंखों में आंसू लिए नए आशियाने की तलाश में बेघर बहूबाजार के मदनदत्ता लेन निवासियों का बस एक ही सवाल है कि इस बार वे कहां जाएं? एक तरफ प्रकाश पर्व दिवाली समीप है दूसरी तरफ इस घटना ने हमारी खुशियों को अंधेरा करके रख दिया। आखिर बार-बार हमें बहूबाजार में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो रेल के निर्माणाधीन टनल के चलते मुसीबतों का सामना क्यों करना पड़े? पत्रिका ने शनिवार को जब मौके की पड़ताल की तो इन शब्दों में कुछ प्रभावित लोगों ने अपनी पीड़ा बयां की। उल्लेखनीय है कि बऊबाजार में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के भूमिगत सुरंग के निर्माण कार्य के कारण शुक्रवार को मदनदत्त लेन की कई इमारतों में दरारें आई थी।
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मेट्रो टनल में पानी घुसना बंद
इस बीच शनिवार को मेट्रो रेल टनल में जलभराव थम गया जबकि बहूबाजार में 34 और मकान खाली कराए गए। अबतक 136 लोगों को होटलों में पनाह मिली है।मदन दत्ता लेन में कोई पांच दशक से रह रहा तो कोई सात दशक से। किसी के धंधे की जीवनदायिनी टूटे घर में रखी है। ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते घरों में दरारें से क्षेत्र के लोग असमंजस की स्थिति में हैं।
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पहले 2019, फिर 2022
इससे पहले 2019 में दुर्गापिटुरी लेन में कम से कम 40 घर क्षतिग्रस्त हो गए थे। जबकि इसी साल मई में फिर वही घटना हुई।
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इनकी जुबानी
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मेट्रो रेल विस्तार कार्य के कारण बहूबाजार के मदनदत्ता लेन में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इधर-उधर टूटने के साथ ही छत की टाइलें भी गिर गईं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि कई निवासियों को अपने घरों को छोडक़र कहीं और शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। लोग सडक़ों पर आ गए -----मीना देवी.
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हमें बस हमारा घर लौटा दो। हमें कुछ नहीं चाहिए। यह घटना पहली बार नहीं घटी। 2019 में भी इस इलाके में लोगों के घरों में दरार आई थी। इस बार भी लगभग 12 से अधिक घरों में दरार आई। घर से बेघर होकर हम आखिर कहां जाएं। सबसे दुखद पहलू यह है कि मेट्रो प्रबंधन की ओर से हमें हादसे से पहले कोई सूचना नहीं दी गई।----विजय प्रमाणिक.
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मेट्रो के काम से घरों में दरारें के साथ ही कई दुकानें बंद हो गई हैं। मदन घोष लेन के 10 घरों में दरारें आने के बाद एक होटल में रात बिताई। रहने के लायक नहीं रह गया है घर। शनिवार सुबह अपने घर के सामने आए घर में फर्नीचर, सामान, कई दस्तावेजों की हालत देख मन व्यथित हो गया। होटलों में भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ----राजेश प्रसाद.
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इलाके में शक्रवार की घटना के बाद एक नया डर फैल गया। कई लोग घर से निकल कर बाहर आ गए। यहां के निवासी फिर से बेसहारा हो गए हैं। 136 लोगों को पांच होटलों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई को अभी तक होटल नहीं मिला है। नहीं पता कि मेट्रो अब कहां ले जाएगी क्योंकि छत सिर से हट गई है। अगर इस जगह को छोडक़र दूसरी जगह भेजा जाता है तो हम धंधा कैसे चलाएंगे?----पारितोष कर.
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एक तरफ हमारे सिर से छत चली गई और दूसरी ओर कुछ सफेदपोश नेता अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं। ये बेहद शर्मनाक है। सबसे बड़ा अहम सवाल ये कि आखिर इसी इलाके में बार-बार यह आपदा क्यों आ रही? यहां के लोग कब तक बेघर होंगे? क्या है स्थायी समाधान?---रितू कुमारी.