आचार्य तुलसी की मासिक पुण्य तिथि पर तेरापंथ सभा भवन में कार्यक्रम
BENGAL NEWS-कोलकाता/लिलुआ (हावड़ा)। आचार्य तुलसी कुशल प्रवचनकार और एक मंजे हुए संगीतकार थे। शांतिदूत आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि जिनेश कुमार ने यह बात कही। मुनि जिनेश कुमार ठाणा - 3 के सान्निध्य में तथा तेरापंथी सभा लिलुआ के तत्वावधान में आचार्य तुलसी की मासिक पुण्य तिथि पर तेरापंथ सभा भवन में कार्यक्रम हुआ। इसमें अन्ताक्षरी भी हुआ। इस अवसर पर मुनि ने कहा संयम और तप में पराक्रम करने वाला साधक महापुरुष कहलाता है। दुनियां में अनेक महापुरुष हुए जिन्होने अपने कर्तृत्व एवं व्यक्तित्व के द्वारा मानवता की एवं जिनशासन की प्रभावना की उनमें एक स्वर्णिम नाम है आचार्य तुलसी। आचार्य तुलसी युग दुष्टा, युग सुष्टा, मानवता के प्रहरी व शांति के पैगम्बर थे। उन्होंने नैतिक विकास व चारित्रिक उन्नयन के लिए अणुव्रत आन्दोलन का सूत्रपात किया।
-----युवापीढी को धर्म का सही मार्ग बताया
तनाव से ग्रस्त युवापीढी को धर्म का सही मार्ग बताया। महिला जागरण, शिक्षा, संस्कार, साहित्य आदि अनेक रचनात्मक कार्यक्रम संघ समाज को दिए। वे अनुशासन प्रिय थे। उनमें शास्ता के अनुपम गुण थे। उन्होंने लम्बी लम्बी यात्रा करके मूर्चि्छत मानवता को संजीवनी औषध देकर उपकार किया। मुनि कुणाल कुमार ने संगीत प्रस्तुत किया। शुभारंभ भजन मंडली द्वारा किया गया। मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा- शरीर का विकास खान पान से होता है। मन का उल्लासमान-सम्मान से होता है, बुद्धि का प्रकाश ज्ञान-विज्ञान से होता है, आत्मा का आभास ध्यान समाधान से , होता है। ध्यान ज्योति व प्रकाश की साधना है। स्वभाव परिवर्तन तनाव मुक्ति मानसिक स्वास्थ्य की साधना है। जिस प्रकार शरीर में मस्तिष्क का वृक्ष के मूल में जड़ का मूल्य है उसी प्रकार धर्म साधना में ध्यान का मूल्य है। ध्यान कर्म निर्जरा व आत्मशोधन की प्रक्रिया है। ध्यान के द्वारा अनेक शक्तियों को उद्घाटित किया जा सकता है।