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WEST BENGAL WBCS 2023–हिन्दी भाषियों ने खोला मोर्चा

डब्ल्यूबीसीएस मेन्स पेपर 1 से हिन्दी, उर्दू, संथाली भाषा हटाने पर जताया रोष, भाषाई अल्पसंख्यक संगठन की बैठक में भविष्य की बनी रणनीति, हाई कोर्ट में सरकार की अधिसूचना के खिलाफ दायर होगी पीआईएल

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WEST BENGAL WBCS 2023 कोलकाता . पश्चिम बंगाल सिविल सेवा परीक्षा (डब्ल्यूबीसीएस) मेन्स पेपर 1 से हिन्दी, उर्दू, संथाली भाषा के हटाए जाने को लेकर हिन्दी भाषियों ने अब मोर्चा खोल दिया। इस संबंध में भाषाई अल्पसंख्यक संगठन (कोलकाता) की ओर से बुधवार को राजभवन के पास डेल्टा हाउस में बैठक हुई। इसमें भविष्य की रणनीति बनी। संगठन की ओर से सरकारी अधिसूचना के खिलाफ रैली, प्रदर्शन के साथ हाई कोर्ट की शरण लेने का फैसला लिया गया। बैठक में मौजूद सदस्यों ने सरकारी अधिसूचना को भाषा के आधार पर मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए आगे की रणनीति पर मंथन किया।

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ये रहे मौजूद

अध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें सचिव ललन सिंह, अनिस कपूर, मोहम्मद इमरान, डीएस अग्रवाल, कर्नल आरके श्रीवास्तव, हाई कोर्ट के एडवोकेट राजेश राय, डॉ. चित्रा बोसमिया, मनोज त्रिवेदी, आशुतोष चतुर्वेदी, शकुन त्रिवेदी, प्रोफसर ललित झा, मंजू सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्ष जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि सरकार के इस कदम से बंगाल में सिविल अफसर बनने की राह हिंदी भाषी छात्रों के लिए मुश्किल हो गई है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में सरकार के इस अधिसूचना के खिलाफ पीआईएल दायर की जाएगी। इसे लेकर किसी भी राजनीतिक दल की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त न करने पर सदस्यों ने निंदा की।

सबसे पहले स्कूलों में बांग्ला भाषा अनिवार्य घोषित हो

तिवारी ने कहा कि सबसे पहले प्रदेश सरकार राज्य के स्कूलों में बांग्ला भाषा को अनिवार्य घोषित करे। क्लास 5 से 12 तक के सिलेबस में इसे अनिवार्य किया जाए। बैठक में शामिल सदस्यों ने कहा कि वे बांग्ला भाषा के खिलाफ नहीं हैं। बल्कि सरकार की यह अधिसूचना बंगाल में रह रहे सभी हिन्दी भाषियों के हित में नहीं है।

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छात्रों के भविष्य पर कुठाराघात

भाषा के आधार पर इस तरह का भेदभाव छात्रों के साथ जीवन से उनके भविष्य पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि जबतक सरकार इसे वापस न लेगी तबतक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने इसे भाषा के आधार पर विभाजन पैदा करने और दुर्भाग्यपूर्ण फैसला करार दिया। उनका कहना है कि इससे समाज में वर्गभेद, जातिभेद को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है मामला?

दरअसल डब्ल्यूबीसीएस मेन्स पेपर 1 से हिन्दी, उर्दू, संथाली भाषा के हटाए जाने से अब परीक्षा में बांग्ला, नेपाली में 300 में 30 फीसदी नंबर अनिवार्य हो गया है।