
केशकाल घाटी
Keshkal Valley: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहाँ के पेड़- पौधे, जीव-जंतु, पहाड़, पर्वत, नदियां, झरने, यहाँ रहने वाले आदिवासी लोग, यहाँ का खानपान हर चीज लोगों का मन मोह लेती है। बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले में स्थित केशकाल घाटी(Keshkal Valley) को यहाँ का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह केशकाल घाटी बस्तर अंचल को छत्तीसगढ़ के कई दुसरे हिस्सों से जोड़ता है।
केशकाल घाटी राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर कोण्डागांव-कांकेर के बीच स्थित है। केशकाल घाटी यहां के घने जगंल, खूबसूरत पहाड़ियां और अपनी घुमावदार सड़क और प्राकृतिक सुंदरता के लिए काफी प्रसिद्द है। छत्तीसगढ़ राज्य में केशकाल घाटी को तेलिन घाटी और बारा भांवर मतलब बारह घुमावदार मोड़ के नाम से भी जाना जाता है।
जो भी यात्री यहां से गुजरता है उसका मन यहीं अटक जाता है। जो पहली बार बस्तर यात्रा कर रहे होते हैं उनके लिए यह बहुत ही ज्यादा ख़ास होता है।
ये है केशकाल घाटी का इतिहास
केशकाल घाटी बस्तर और दक्षिण भारत छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क है। बरसात के दिनों में यहां काफी मात्रा में बड़े पत्थर रोड में गिर जाते हैं इस वजह से यहां बहुत लम्बा जाम लग जाता है। ऐसे में यह यात्री गाड़ियों और मालवाहक गाड़ियों के लिए परेशानी बन जाता है। चूंकि यह बस्तर को अन्य दुसरे हिस्सों से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क है इस वजह से लोगों को काफी परेशानियां होती है। कोंडागांव जिले के एक पर्वत में स्थित केशकाल घाटी सर्पाकार सड़को के लिए काफी प्रसिद्द है।
केशकाल घाटी (Keshkal Valley)का निर्माण कार्य सन् 1879 में शुरू हुआ था। लेकिन पहाड़ तोड़ कर रास्ता निकालने का काम सन् 1890 में पूरा हुआ। पहाड़ से रास्ता निकल जाने से बस्तर बाहरी दुनिया के संपर्क में आया। इस घाटी के निर्माण कार्य में लगभग 10 से 11 वर्ष लगे थे।
दरअसल, सन् 1890 में केशकाल गॉव का क्षेत्र पूरा जंगल झाड़ी से भरा हुआ था। वहां न तो कोई गाँव स्थिति था और न ही कोई आबादी। बड़े-बड़े पहाड़ों के कारण आगे जाने का रास्ता पूरी तरह से अवरूद्ध था। इस पहाड़ को तोड़कर बीच से रास्ता निकालने का निश्चय किया गया ताकि बस्तर राज्य का संपर्क बाहरी दुनिया से हो सके। जिसे सन् 1890 में पूर्ण किया गया।
केशकाल घाटी का मंदिर :-तेलिन मां
केशकाल घाटी रायपुर जगदलपुर हाइवे में पड़ने वाला बहुत ही खूबसूरत रास्ता है। इस घाट के शुरुआत में ही एक मंदिर स्थित है। इस मंदिर को तेलिनसती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। तेलीनसती मंदिर आने जाने वाले यात्रियों के लिए आस्था का मंदिर है। जो भी लोग यहां से गुजरते हैं यहाँ जरूर रुकते हैं।
मंदिर में माता का आशीर्वाद लेकर भक्त प्रसाद लेते जातें है।
केशकाल घाटी में कितने मोड़ है
बस्तर के प्रवेश द्वार यानि केशकाल घाटी (Keshkal Valley) में मुख्य रूप से 12 मोड़ हैं। इस घाटी की लम्बाई करीब 5 कि0मी0 है जिसे बारा भांवर मतलब बारह घुमावदार मोड़ भी कहते हैं। इस घाटी में बारह भांवर की चढ़ाई के बाद अंन्तिम उंचाई में सीता पंचवटी स्थित है।
Updated on:
04 May 2024 10:29 am
Published on:
11 Dec 2022 07:04 pm
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