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आदिवासी क्षेत्रों में हुआ मेले का आयोजन, खासियत ये कि यहां शमिल हुए पांच परगना के देवी देवता

आदिवासी इलाकों की संस्कृति, पूजा-पाठ और उत्सव अनोखे होते है।

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madai mela

आदिवासी क्षेत्रों में हुआ मेले का आयोजन, खासियत ये कि यहां शमिल हुए पांच परगना के देवी देवता

बोरगांव/गम्हरी. आदिवासी इलाकों की संस्कृति, पूजा-पाठ और उत्सव अनोखे होते है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में बहुत सी आदिवासी जातियां रहती है। यहां हर साल की तरह इस वर्ष भी वार्षिक पारंपरिक भंगा राम मंडई मेले का आयोजन किया गया। इस मेले की खासियत ये थी कि आस पड़ोस के पांच परगना के देवी देवता अपनी पारंपरिक वेशभूषा के साथ इस मेल में शामिल हुए।

इस पारंपरिक मेले में ग्रामीणों के द्वारा देवी देवताओं को पुष्प माला से श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। तत्पश्चात देवी देवताओं के द्वारा पूरे मेले का परिक्रमा किया गया। ग्रामीणों ने बड़ी उत्साह के साथ मेले का आनंद उठाया और जमकर खरीदारी की। मेला आयोजक समिति द्वारा मेले में व्यवस्था बहुत अच्छे तरीके से किया गया।

बड़ेडोंगर मेले में प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मीना बाजार आकर्षण का केंद्र रहा जहां आकाश झूला, ब्रेक डान्स, ड्रेगन झूला, बच्चों के लिए मारुती झूला, हनुमान झूला और बच्चों के उछल कूद के लिए मिकी माउस का लोग भरपूर आनंद उठाए।

पेयजल से लेकर अन्य सभी सुविधाएं समिति द्वारा लोगों को उपलब्ध कराई गई। इस मेले में ग्राम के गायता, पुजारी, ग्राम के सरपंच सुनिता मरकाम, नोहरू राम मरकाम, पांडरा मरकाम, दानीराम मरकाम, बालाराम, राधेलाल यादव, गांडोराम नेताम, शंकर लाल यादव, दीलिप नेताम, मोहनलाल नेताम, लच्छीन्दर मरकाम, हेमन्त कुमार मरकाम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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