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थम्ब इंप्रेशन के जरिए ऑन लाइन उपस्थिति देना था शिक्षकों को, लेकिन अब तक नहीं दे पा रहे, जानें क्या है वजह

- सरकार की कॉसमोस योजना हो रही फेल

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कोरबा

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Shiv Singh

Jul 24, 2018

थम्ब इंप्रेशन के जरिए ऑन लाइन उपस्थिति देना था शिक्षकों को, लेकिन अब तक नहीं दे पा रहे, जानें क्या है वजह

थम्ब इंप्रेशन के जरिए ऑन लाइन उपस्थिति देना था शिक्षकों को, लेकिन अब तक नहीं दे पा रहे, जानें क्या है वजह

कोरबा. साफ्टवेयर में दिक्कत और नेटवर्क की परेशानी के कारण सरकार की कॉसमोस योजना फ्लॉप हो रही है। शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस की योजना पर ग्रहण लग गया है। जिले में शिक्षकों की कुल संख्या ७ हजार से अधिक है। वर्तमान में इसकी उपस्थिति का विवरण अफसरों को प्राप्त नहीं हा रहा है। हालांकि चिप्स द्वारा इसमें सुधार करने की बात कही जा रही है।

पड़ताल में पता चला कि हर तीसरे स्कूल के टेबलेट में कोई न कोई खराबी है। कोरबा विकासखण्ड के प्राथमिक शाला भटगांव के प्रभारी प्रधान पाठक नोहर चन्द्रा ने बताया कि टैबलेट का चार्जर खराब होने के कारण यह चालू ही नहीं हो रहा है। हैंग होने जैसी समस्या भी आम बात है। शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी सहित माध्याह्न भोजन योजना पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक स्कूल में टेबलेट वितरित कर वर्तमान सत्र की शुरूआत में ही सभी शिक्षकों की कमीशनिंग कराई गई थी। इसमें थम्ब मशीन इनबिल्ट है। मैनुअली अटेंडेंस की जगह शिक्षकों को इसी टेबलेट में थम्ब इंप्रेशन के जरिए ऑन लाइन अटेंडेंस देना था, लेकिन तकनीकी समस्या से अब तक शिक्षक अटेंडेंस नहीं दे पा रहे हैं।
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छात्रों की जानकारी भी अपडेट नहीं
इस योजना का उद्देश्य स्कूलों को पूरी तरह से ऑनलाइन करना है। लेटर, सर्कुलर से लेकर सभी गतिविधियां इसी टेबलेट के माध्यम से प्रेषित की जानी है, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक स्कूलों में इसे सिर्फ अटेंडेंस लगाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। यही नहीं टेबलेट के माध्यम से छात्रों की पूरी जानकारी भी सर्वर में अपलोड किया जाना था, लेकिन यह काम भी पूरा नहीं हुआ है।

23 स्कूलों में कमिशनिंग ही नहीं
जिले के १९ स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जहां अन्य स्कूलों के शिक्षकों को अटैच करके व्यवस्था बनाई गई है। इसी तरह चार स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। यहां के शिक्षक भी मेडिकल अवकाश पर हैं। इसलिए इन स्कूलों का टेबलेट का अलॉट हुआ है, लेकिन शिक्षकों के आंकड़े फीड कर कमिशनिंग नहीं की गई है।

मिड डे मील के आंकड़े दर्ज नहीं, फिर मॉनीटरिंग कैसे
टेबलेट के माध्यम से रोजाना मिड डे मील की भी मॉनीटरिंग होनी है। टेबलेट का एप स्कूल के चुनिंदा बच्चों के थम्ब से ही खुले ऐसी तकनीक इसमें लोड की गई है। बच्चों से एप खुलवाने के बाद उस दिन कितने बच्चों ने मध्याह्न भोजन खाया या नहीं इसे भी रोज अपडेट करना है। बच्चों का भी आधार लिंक रहेगा इसलिए इस तरह अब फर्जी तरीके से ज्यादा बच्चों के मिड डे मील खाने की जानकारी भी अब रूकेगी। जितने बच्चे खाएंगे उतने का ही भुगतान शासन उस स्कूल के लिए भेजेगी, लेकिन अब तक इसकी एण्ट्री ही नहीं हो सकी है।

संस्था प्रमुखों को ऐसे दिए गए थे निर्देश
संस्था प्रमुखों को टेबलेट में अपने स्कूल का नाम दर्ज करेंगे। स्कूल खुलने व बंद होने का समय भी लोड करेंगे। रोजाना स्कूल खुलने के समय शिक्षकों को टेबलेट में थम्ब इम्पे्रशन करना है, जो शिक्षक या शिक्षाकर्मी देरी से आया तो वह अंगूठा नहीं लगा सकेगा। इसी तरह कई शिक्षक जल्दी स्कूल से चले जाते हैं उन्हें स्कूल बंद होने के समय थम्ब लगाना है।

-कॉसमोस योजना के तहत २१७५ टेबलेट वितरित किए गए थे। खराबी आने पर इसे तत्काल सुधरवाया जाता है। टेबलेट के माध्यम से उपस्थिति की रिपोर्ट प्रदर्शित नहीं हो रही है। एमडीएम के आंकड़े भी एंट्री नहीं हो पा रहे हैं। चिप्स विभाग द्वारा इसे ठीक करने का कार्य जारी है- रामेश्वर जायसवाल, डीएमसी एसएसए