
कोरबा . प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। बीमा अन्न दाता किसान को फायदा पहुंचाने के बजाए बीमा कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। सरकार और किसान के पैसे से बीमा कंपनियां मालामाल हो रही है।
खरीफ फसल के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले के 15 हजार 917 किसानों ने बीमा कराया था।
प्रीमियम राशि के तौर पर बीमा कंपनियों को कई करोड़ रुपए सरकार की ओर से उपलब्ध कराया गया है। इस उम्मीद पर कि फसल खराब होने पर किसानों को लाभ मिलेगा। फसल के कीमत की भरपाई बीमा कंपनियां करेंगी। और यह योजना किसानों के लिए मददगार साबित होगी इसकी उम्मीद नहीं है।
बीमा कंपनियों ने 164 किसानोंं को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राहत देने के लिए चयन किया है। लेकिन किसानों को कितनी रहत मिलेगी? यह अभी स्पष्ट नहीं है और बीमा भुगतान की प्रक्रिया लंबित है। जिले में यह स्थिति तब है, जब अल्प वर्षा के कारण सरकार ने पाली तहसील को सूखा ग्रस्त घोषित किया है।
कृषि विभाग का मानना है कि सूखे से लगभग साढ़े पांच हजार किसान प्रभावित हुए हैं। लेकिन बीमा कंपनियां इससे ताल्लुक नहीं रखती है। बीमा की शर्त के मुताबिक कंपनियों ने जिले में महज 164 किसानों को पात्र माना है। यानी सरकार की फसल बीमा योजना का लाभ जिले के १६४ किसानों को ही मिलेगा। वह भी कितना? यह स्पष्ट नहीं है।
योजना में बदलाव की जरूरत
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रचार प्रसार शासन प्रशासन प्रमुखता से करता है। कृषि विभाग और सहकारी समितियों के जरिए किसानों की फसल का बीमा किया जाता है। लेकिन बीमा की नीति किसानों के बजाए कंपनियों के लिए मुनाफे वाली सौदा साबित हो रही है। किसान भी मानने लगे है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव की जरूरत है। इसे किसान हितैषी बनाने की जरूरत है। ताकि वास्तव में किसानों को बीमा का लाभ मिल सके।
Published on:
19 Feb 2018 10:10 am
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