
CG Human Story : 77 वर्षीय फूलो बाई को वृद्धाश्रम में भी नहीं मिली जगह, सिसकते हुए नम आंखों से बोली- एक झोपड़ी है, जहां ठंड लगती है
कोरबा. परिवार के नाम पर मेरी मौत के बाद आंसू बहाने वाला भी कोई नहीं है। अब जीवन के कुछ अंतिम दिन बचे हैं, सोंचती हूं कम से कम वह आराम से गुजर जाए, लेकिन अब लगता नहीं कि ऐसा हो पाएगा। घर के नाम पर सिर्फ एक टूटी-फूटी झोपड़ी है जहां ठंड बहुत लगती है। अपनी व्यथा लेकर सर्वमंगला के वद्धाश्रम भी गई थी, लेकिन वहां भी आश्रय नहीं मिला। बताया गया कि यहां जगह खाली नहीं है।
पथराई डबडबाई आंखों से कलेक्टोरेट परिसर को निहारती चलने के लिए हाथ में छड़ी का सहारा लिए फूलो गोंड ने अपनी व्यथा कह दी। रूमगड़ा से आई फूलो अब वृद्ध हो चली है, मतदाता परिचय पत्र के अनुसार उनकी उम्र फिलहाल ७७ वर्ष है। वृद्ध फूलो के पास रहने के लिए घर तो नहीं है, लेकिन वोटर कार्ड अपडेड है। फूलो को मूलभूत सुविधाएं मिले इसके लिए किसी ने पहल नहीं की, लेकिन मतदाता परिचय पत्र आसानी से पहुंचा दिया गया है।
फूलो कहती हैं कि पति सालों से पहले कहीं चले गए थे। संतान नहीं है, रहने के लिए सिर्फ एक टूटी-फूटी झोंपड़ी भर है। झोपड़े की हालत भी अब ठीक नहीं है, इसलिए पड़ोस में रहने वाली महिला को लेकर सर्वमंगला मंदिर में संचालित होने वाले वृद्धाश्रम गई थी। लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लगी। बताया गया कि वृद्धाश्रम में फिलहाल सभी सीटें फुल है।
इच्छा है सिर्फ एक छोटे से घर की
फूलो को कलेक्टोरेट लेकर पहुंची उनकी पड़ोसी हीरा बाई ने कहा कि फूलो की तबियत अब ठीक नहीं रहती। पहले कुछ काम भी कर लिया करती थी, लेकिन उनमें अब मेहनत करने की क्षमता नहीं रह गई है। मानवता के नाते मैंने पिछले एक माह से इन्हें अपने घर में आश्रय दिया है। लेकिन मेरा घर भी छोटा सा है, परिवार है। जिसके कारण मुझे भी अब दिक्कत हो रही है। सरकार इतनी बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाती है। प्रशासन की तरफ से फूलो के लिए कुछ इंतजाम हो जाता तो बेहतर होता।
Published on:
12 Feb 2019 12:10 pm

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