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लापरवाही की हद: अस्पताल में महिला को चढ़ा दिया एक्सपायरी डेट ग्लूकोज, दोषी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू

CG NEWS: कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल की घोर लापरवाही सामने आई है। महिला वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी ने अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग महिला पर कालातीत ग्लूकोज की बॉटल चढ़ा दी। इस बीच परिजनों की सजगता से महिला की जान बच गई। तत्काल कर्मचारी को सूचना दी। कर्मचारी ने बॉटल को निकाली। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।

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लापरवाही की हद: अस्पताल में महिला को चढ़ा दिया एक्सपायरी डेट ग्लूकोज, दोषी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू

CG NEWS: मेडिकल कॉलेज अस्पताल सह जिला अस्पताल में व्यवस्था सुधारने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रबंधन को हर साल करोड़ा रुपए प्रदान कर रही है, लेकिन कुछ कर्मचारियों की लापरवाही के कारण अस्पताल की छवि धूमिल हो रही है। सीएसईबी कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कुछ दिन पहले पेट की परेशानी व एलर्जी की समस्या आई।

महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों की सलाह पर अस्पताल के प्रथम तल के महिला वार्ड में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान स्वास्थ्य लगभग सामान्य हो गया था। इस बीच रविवार की शाम वार्ड में ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी ने ग्लूकोज की बॉटल महिला के शरीर में चढ़ा दी। कुछ देर के बाद परिजनों की नजर बॉटल पर उल्लेखित तिथि पर पड़ी। बॉटल में सीजीएमएससी द्वारा निर्मित दवाई की तिथि दिसंबर 2019 और कलातीत की तिथि नवंबर 2022 थी। इसके बाद परिजन परेशान हो गए।

परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को तत्काल इसकी सूचना दी। कर्मचारी ने भी आनन-फानन में बॉटल को निकाला। अन्य मरीजों को चढ़ाए गए बॉटलों की भी जांच की गई। इस दौरान एक और मरीज को चढ़ाई गई कालातीत बॉटल मिली। इसे लेकर परिजनों ने रात में ही जमकर हंगामा किया। प्रबंधन को इसकी जानकारी सोमवार को हुई। इसके बाद से अधिकारी व कर्मचारियाें के बीच हड़कंप मच गया। हालांकि समय पर परिजनों की सतकर्ता से महिला की जान बच गई। अभी तक बुजुर्ग महिला के शरीर पर विपरित प्रभाव नहीं पड़ने की बात कही गई है।

प्रबंधन की सफाई, बोले: रिएक्शन का खतरा नहीं, असर हो जाता है कम
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि दवाई की तिथि समाप्त होने के बाद भी कुछ माह तक अवधि होती है, लेकिन सतकर्ता के लिए शासन के गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित तिथि से पहले उपयोग किया जाता है। तिथि की समाप्ति के बाद ड्स्पिोज कर दिया जाता है। हालांकि इससे शरीर पर किसी तरह का रिएक्शन का खतरा नहीं होता। दवाई का असर कम हो जाता है।

बिना तिथि जांच किए दी जा रही दवाइयां
स्वास्थ्य कर्मचारियों की इस तरह की लापरवाही से अस्पताल प्रबंधन के व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है। अस्पताल के स्टोर में एक से डेढ़ साल तक दवाईंया रखी रही, लेकिन इसका उपयोग नहीं किया गया। जब तिथि समाप्त बाद वार्ड दवाई वितरण कर दिया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने भी उसे बिना जांच के बुजुर्ग मरीज के शरीर पर चढ़ा दी गई। जबकि कुछ कर्मचारी अस्पताल में कई बार दवाईयां नहीं होने का हवाला देकर बाहर से खरीदने के लिए वापस लौटा दिया जाता है।

कालातीत तिथि की दवाइयां वार्ड से हटाई गईं
अस्पताल में कलातीत दवाई वितरण की सूचना के बाद से अस्पताल प्रबंधन हरकत में आए। सोमवार को स्टोर से लेकर दवाई वितरण कक्ष व सभी वार्डो में कलातीत दवाईयों की जांच कराई गई। एक माह बाद समाप्त होने वाली दवाईयों को भी अलग करने और कलातीत तिथि की दवाईयों को डिस्पोज के लिए अलग करने के निर्देश दिए गए।

लापरवाही किसकी, इस पर होगी जांच
अस्पताल में लापरवाही सामने आने के बाद अब प्रबंधन ने मामले में जांच कार्रवाई की बात कही है। हालांकि जांच कार्रवाई तक रात की पाली में तैनात एक नर्स स्टॉफ को वार्ड से हटा दिया गया है। नर्स स्टॉफ को दूसरे विभाग में तैनात किया गया है। जबकि दवाई वितरण की जिम्मेदारी दवाई स्टोर से लेकर डिस्पोज करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आ रही है।

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