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पानी की मांग को लेकर बांकी बस्ती में 12 घंटे तक किया चक्काजाम

बांकीमोंगरा के खनन प्रभावित क्षेत्र में पानी की आपूर्ति रोके जाने से नाराज लोग सड़क पर उतर गए। शुक्रवार सुबह से बांकीमोंगरा बस्ती में चक्काजाम कर दिया। लगभग 12 घंटे से चक्काजाम जारी है। समस्या का हल निकालने के लिए दोनों पक्षों में बातचीत जारी है।

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पानी की मांग को लेकर बांकी बस्ती में 12 घंटे तक किया चक्काजाम

पानी की मांग को लेकर बांकी बस्ती में 12 घंटे तक किया चक्काजाम

स्थानीय लोगों ने बताया कि बांकी बस्ती, मड़वाढोढ़ा, पुरैना में एसईसीएल कोरबा एरिया के प्रबंधन ने पानी की आपूर्ति रोक दिया है। इससे क्षेत्र के लोगाें को परेशानी हो रही है। नाराज लोगों ने कम्युनिस्ट पार्टी की पार्षद राजकुमारी कंवर के नेतृत्व में बांकी बस्ती के पास चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम सुबह 10 बजे से शुरू हुआ जो देर रात तक जारी है। इससे सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतार लगी हुई है। समस्या के समाधान को लेकर प्रदर्शनकारियों और एसईसीएल के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। अभी तक समाधान नहीं निकल सका है। बांकी बस्ती और पुरैना गांव में पाइप लाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति, ग्राम बांकी बस्ती, मडवाढोंढ़ा, पुरैना के तालाब में खदान से पाइप लाइन के जरिए पानी भरने, खदान का पानी किसानों की खेत को देने की मांग कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन में स्थानीय पार्षद के अलावा माकपा नेता प्रशांत झा, किसान सभा के दीपक साहू, जय कौशिक और दामोदर के अलावा बड़ी संख्या में खदान से प्रभावित गांव की महिलाएं शामिल हैं।

भीषण गर्मी में पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे भू- विस्थापित, प्रदर्शन कर रोजगार की मांग

खदान से प्रभावित गांव के लोगों ने अपने लिए रोजगार की मांग किया। नौकरी, पुनर्वास और मुआवजा को लेकर प्रशासन तक अपनी बातों को पहुंचाया। मांगों को लेकर एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से प्रभावित आधा दर्जन से अधिक गांव के लोग शुक्रवार को एक स्थान पर एकत्र हुए। सर्वमंगला चौक, ट्रांसपोर्टनगर, सीएसईबी चौक होकर भीषण गर्मी में पैदल चलते हुए दोपहर लगभग एक बजे कोरबा कलेक्ट्रेट कार्यालय की गेट पर पहुंचे। मांगाें के समर्थन में लोग गेट के बाहर खड़े हो गए। नारेबाजी करने लगे। कुछ लोग सड़क पर बैठ गए। इससे मेनरोड कुछ देर के लिए जाम हो गया। भू- विस्थापिताें ने कोरबा कलेक्टर के नाम पर कनिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कोल इंडिया की पुनर्वास नीति को रद्द करने की मांग करते हुए राज्य सरकार की पुनर्वास नीति को लागू करने कहा। इसके तहत प्रत्येक खातेदार को रोजगार की मांग किया। वर्षों से लंबित प्रकरणों में रोजगार देने की मांग किया। ग्राम रिसदी, खोडरी, पड़निया, सोनपुरी, पाली, जटराज, चुरैल, अमगांव, गेवरा और खैरभावना की भूमि और मकान का वर्ष 2022- 23 के आधार पर मुआवजा की मांग किया। बसाहट के लिए 15 डिसमिल जमीन की मांग किया। बसाहट के बदले 25 लाख रुपए देने की मांग किया। 18 सूत्रीय मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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