23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धरी रह गई सारोवर धरोहर योजना और कचरे से पटा यह तालाब अब निस्तारी के लिए संकट

वार्ड क्रमांक 33 मेें सिर्फ एक तालाब, लेकिन उसका भी रखरखाव करने किसी ने नहीं की पहल

2 min read
Google source verification

कोरबा

image

Shiv Singh

Apr 29, 2018

वार्ड क्रमांक 33 मेें सिर्फ एक तालाब, लेकिन उसका भी रखरखाव करने किसी ने नहीं की पहल

वार्ड क्रमांक 33 मेें सिर्फ एक तालाब, लेकिन उसका भी रखरखाव करने किसी ने नहीं की पहल

कोरबा . रामपुर तालाब कचरे से पट चुका है। पांच साल से सफाई नहीं कराने का नतीजा है कि अब इस तालाब मेंं एक बाल्टी पानी तक मिल पाना संभव नहीं है। निगम के पास फंड का रोना है। सफाई को लेकर कोई भी आगे नहीं आ रहा है। इससे बस्तीवासियों के सामने निस्तारी को लेकर संकट आ खड़ा है।


वार्ड क्रमांक 33 रामपुर बस्ती में सिर्फ एक ही तालाब है रामपुर तालाब को डेम के नाम से जाना जाता है। उक्त तालाब सरकारी जमीन पर है। तालाब 45 साल पुराना है। पूरा बस्ती इसी ही तालाब पर निर्भर रहता है। तालाब बहुत बडा़ नहीं है। लेकिन पानी का स्त्रोत बेहतर होने की वजह से यहां साल भर पानी जमा रहता है। लेकिन पिछले पांच छह साल से इस तालाब में सफाई नहीं कराई जा रही है। कुछ साल तक तालाब का आधा हिस्सा कचरे से पटा रहा।

जलकुंंभी और घास उग गए। लेकिन बाद वर्तमान में ये स्थिति हो चुकी है कि पूरा तालाब इससे पट चुका है। पानी पीना तो अब दूर की बात निस्तारी के योग्य भी नहीं बचा। इस तालाब के सफाई को लेकर निगम के पास फंड नहीं है। ना ही किसी के माध्यम से सफाई कराने को लेकर रूचि ली जा रही है। जबकि इस तालाब को सफाई कराने के लिए बहुत अधिक फंड की जरूरत नहीं है। उसके बाद भी काम नहीं कराने को लेकर लोगों में आक्रोश है।


सफाई तो दूर पूरे मोहल्ले की नाली को जोड़ दिया
सफाई तो दूर की बात नगर निगम द्वारा रामपुर बस्ती के नालियों को अब इस तालाब के मुहाने से जोड़ दिया गया है। इससे तालाब और भी दूषित होता जा रहा है। नालियों का गंदा पानी व घरों से फेंकने वाला कचरा भी अब तालाब में डंप होने लगा है। इस वजह से अब तालाब मेेंं गंदगी बढ़ गई है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।


सांसद के आश्वासन के बाद भी नहीं हुई सफाई
सांसद डॉ बंशीलाल महतो दो माह पूर्व उक्त तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे थे। सांसद ने लोगों से मुलाकात कर समस्या जानी थी। और जल्द तालाब सफाई कराने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन अब तक कोई भी अधिकारी तालाब को झांकने तक नहीं आया है। गर्मी बढऩे के साथ अब पानी की समस्या भी गहराने लगी है। लोगों को उम्मीद थी कि गर्मी से पहले सफाई होने से निस्तारी में कुछ राहत मिलेगी।


पार्षद दे सकते हैँ अपना मद, लेकिन वार्ड पार्षद रूचि नहीं ले रहा
शासन द्वारा अब तालाबों की सफाई को लेकर पार्षदों व एल्डरमेन के मद में यह प्रावधान दिया गया है कि राशि तालाब पर भी खर्च की जा सकती है। एक साल का मद लगभग सात लाख रूपए है। अगर वार्ड पार्षद चाहे तो निश्चित तौर पर मद के आधे रकम से ही वार्ड का कायाकल्प हो सकता है।