
बैंक प्रबंधक योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिलाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
शनिवार को बैकर्स की जिला स्तरीय परामर्शदात्री/पुनरीक्षा समिति (डीएलसीसी) की तिमाही बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों से प्रशासन के अधिकारी काफी नाराज हुए। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक के दौरान शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विभागवार समीक्षा की गयी।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल ने शासकीय योजनाओं में संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर बैंक अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की। जिले के विभिन्न विभागों द्वारा बैंको को पर्याप्त प्रकरण प्रेषित किये गये हंै,
किन्तु बैंकों द्वारा लक्ष्य के अनुरूप स्वीकृति की कार्यवाही नहीं की गई। चन्द्रवाल ने सभी बैंकों को निर्देश दिए कि शासकीय योजनाओं के प्रकरणों को निर्धारित अवधि में निराकरण करें। प्रोसेसिंग के नाम पर बैंक लोगों को बार-बार चक्कर न लगवायें।
शासकीय विभाग एवं बैंक आपसी सामंजस्य से इस कार्य को प्राथमिकता से पूरा करें।
बैठक में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) सुरेन्द्र शाह ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अतंर्गत तीन करोड़ 74 लाख लक्ष्य के विरुद्ध तीन करोड़ 89 लाख 50 हजार रुपये के ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये है एवं वितरण केवल एक करोड़ 12 लाख 45 हजार रुपये का ही हुआ है। राष्ट्रीय शहरी आजीविका
मिशन स्वरोजगार कार्यक्रम के अंतर्गत लक्ष्य 850 के विरुद्ध 597 प्रकरण बैंकों को प्रेषित किये गये इनमें से 161 प्रकरण स्वीकृत किये गये है एवं 88 प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई है। समूह ऋण के अंतर्गत लक्ष्य 80 के विरुद्ध 28 प्रकरण प्रेषित किये गये इनमें केवल पांच प्रकरण स्वीकृत किये गये है एवं पांच प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई है। बैंक लिंकेज ऋ ण के अंतर्गत लक्ष्य 200 के विरुद्ध 135 प्रकरण प्रेषित किये गये।
प्रेषित प्रकरणों में 29 प्रकरण स्वीकृत किये गये है एवं 20 प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई। जिला पंचायत सीईओ द्वारा बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गया कि यदि प्रकरण स्वीकृत योग्य नहीं है तो स्पष्ट कारणों के साथ प्रकरण वापस करें एवं 31 जनवरी 2018 तक लक्ष्य की पूर्ति करें।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम केवीआईबी के अंतर्गत लक्ष्य 70 के विरुद्ध 102 प्रकरण प्रेषित किये गये। प्रेषित प्रकरणों में 39 ऋण प्रकरण स्वीकृति प्रदान की गई है। सभी बैंक उक्त शिविर में भागीदारी सुनिश्चित करें एवं शीघ्र लक्ष्य की पूर्ति करें।
जिला उद्योग केन्द्र (डीआईसी) अंतर्गत लक्ष्य 101 के विरुद्ध 187 प्रकरण प्रेषित किये गये प्रेषित प्रकरणों में 54 ऋ ण प्रकरणों में स्वीकृति प्रदान की गई एवं 15 प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई।
सीईओ द्वारा बैंकों को पुन: निर्देश दिया गया कि यदि प्रकरण स्वीकृति योग्य नहीं है तो स्पष्ट कारणों के साथ प्रकरण वापस करें एवं 31 जनवरी 2018 तक लक्ष्य की पूर्ति करे।
एलडीएम ने बैठक मे बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लक्ष्य 34 के विरुद्ध 44 प्रकरण प्रेषित किये गये प्रेषित प्रकरणों में आठ प्रकरणों की स्वीकृति प्रदान की गई। चन्द्रवाल द्वारा बैंकों को प्रकरणों के निपटान के लिए 10 जनवरी 2018 तक का समय सीमा निर्धारित की गई।
अंत्योदय स्वरोजगार योजना- इस योजना के अंतर्गत लक्ष्य 343 के विरुद्ध 168 प्रकरण प्रेषित किये गये हैं। प्रेषित प्रकरणों में 21 ऋण प्रकरणों की स्वीकृति प्रदान की गई एवं 21 प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई। इसी प्रकार आदिवासी स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लक्ष्य 189 के विरुद्ध 248 प्रकरण प्रेषित किये गये प्रेषित प्रकरणों में 36 ऋण प्रकरणों की स्वीकृति प्रदान की गई
एवं 36 प्रकरणों में वितरण की कार्यवाही की गई। जिला पंचायत सीईओ द्वारा बैंकों को निर्देश दिया गया कि एक माह के अंदर निर्धारित लक्ष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करें।
बैठक में सीईओ द्वारा सभी बैंकों को निर्देश दिए गये कि बैंकों द्वारा महिला स्वसहायता समूह के खाता खोलने में अनावश्यक विलम्ब किया जा रहा है। खाता खोलने का समयावधि निर्धारित करें साथ ही बैंकर्स अपनी कार्य प्रणाली में सुधार लायें शिकायत की स्थिति में कड़ी कार्यवाही की जावेगी।
बैठक में आरबीआई रायपुर के प्रबंधक अनुराग चन्द्रा, क्षेत्रीय प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक क्षेत्रीय कार्यलय कोरबा प्रभाष बोस, डीडीएम राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) वी चांदेकर नोडल अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैक सुशील जोशी, महाप्रबंधक उद्योग विकास आरसीएस ठाकुर, कृषि, मछली पालन, पशुपालन, उद्यान, अंत्याव्सायी विकास विभाग के जिला अधिकारी सहित कोरबा जिले के विभिन्न शाखाओं के शाखा प्रबंधक उपस्थित थे।
Published on:
30 Dec 2017 08:41 pm
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