
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के नाम पर यहां हो रहा फर्जीवाड़ा, अधिकांश कंपनियों की जानकारी गलत
जयंत कुमार सिंह@कोरबा. जिले में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना कैसे संचालित हो रही है, इसका अंदाजा इस योजना में रजिस्टर्ड 19 एम्प्लॉयर या नियोक्ता कंपनियों की डिटेल से लगाया जा सकता है। नियोक्ता कंपनी का मतलब जो नियोजित करता है या जो रोजगार देता है। विभाग की वेबसाइड पर दर्ज नियोक्ता कंपनियों की हकीकत खंगालने पर चौंकाने वाली कई बातें सामने आई।
ऐसी कई कंपनियों के नाम सामने आए, जिसका मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से कोई लेना-देना ही नहीं है। एक छोटी सी दुकान को प्राइवेट लिमिटेड का तमगा देकर नियोक्ता कंपनी बता दिया गया है। एक कंपनी ने तो विगत चार-पांच साल पहले ही काम छोड़ दिया है, फिरभी उसके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक और कंपनी की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि उसका भी इस योजना से कोई लेना देना नहीं है। जबकि, बेबसाइट 15 फरवरी 2019 को अपडेट हुई है।
अधिकांश के नंबर बंद, पता गायब
ये वो कंपनियां थीं, जिसके नंबर चालू थे और पता सही था। लेकिन, इसी वेबसाइट पर दर्ज कई कथित कंपनियों के नंबर सेवा में नहीं हैं और जब उनके पते पर उन्हें तलाशने की कोशिश की गई तो वो वहां भी नहीं मिली।
मेरा कोई लेना देना नहीं
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के वेबसाइट पर नियोक्ता कंपनी के रूप कोसाबाड़ी चौक पर फ्रेंड्स इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड का नाम दर्ज है। इसका एम्प्लायर कोड ईएमपी 143 है। जब यहां पड़ताल की गई तो इस दुकान के संचालक फहीम शेख ने बताया कि उन्होंने कभी अपनी दुकान का रजिस्टे्रशन इस योजना के तहत कराया ही नहीं है। उनकी दुकान प्राइवेट लिमिटेड की श्रेणी में आती ही नहीं है।
5 साल पहले छोड़ दिया
वेबसाइट पर दर्ज एक हेल्थ सेंटर जिसे नियोक्ता कंपनी बताया गया है, उससे संपर्क किया गया तो संचालक डॉ. फिरोज अंसारी ने बताया कि उन्होंने 4-5 साल पहले ही काम छोड़ दिया है। अब वो अपनी निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद भी उनका नाम वहां कैसे दर्ज है, ये उन्हें नहीं मालूम है। इतना ही नहीं उन्होंने कभी किसी को कोई रोजगार नहीं दिया है।
जानकर रह गया हैरान
वेबसाइट पर दर्ज अंतिम नियोक्ता सरकारी कंपनी सीएसपीडीसीएल है। इसका कोड ईएमपी 831 दिया गया है। पता ग्राम गोढ़ी जिला कोरबा है। नौकरी के लिए जिस व्यक्ति से संपर्क करने वेबसाइट पर नाम दिया गया है वह छात्र है। उसने वर्ष 2013-14 में सुराज शिविर में रोजगार के लिए आवेदन दिया था। रोजगार तो नहीं मिला लेकिन वेबसाइट ने सीएसपीडीसीएल का कर्मचारी या अधिकारी जरूर बना दिया। वर्तमान में ये व्यक्ति अपने दम पर एक मंडी में डाटा इंट्री का कार्य कर रहा है। जब उसे इस गडबड़झाले की जानकारी दी गई तो वह हैरान रह गया।
सिर्फ नाम
ऐसे ही एक और योग और नेचुरल थैरेपी के नाम से दर्ज नियोक्ता कंपनी की पड़ताल की गई तो पाया गया कि इस कंपनी ने भी कई साल पहले ही इस कार्य को छोड़ दिया है। इसके बाद भी इसके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जांच के बाद होगी उचित कार्रवाई
मुख्यमंत्री कौशल विकास के एपीओ अरुणेंद्र मिश्रा ने बताया कि जो रोजगार प्रदान करते हैं या जहां पर रोजगार दिया गया हो उसे एप्लायर कहते हैं। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के पोर्टल पर रजिस्टर्ड कंपनियों के नाम है। पोर्टल पर यदि फर्जी कंपनियों के नाम है तो उसे चेक कराता हूं। इसके बाद जो उचित होगा किया जाएगा।
Published on:
16 Mar 2019 09:49 am

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