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CG Human story : 5 साल की सिया के मां है ना पिता, बूढ़े नाना-नानी अच्छी शिक्षा के लिए चाहते हैं आरटीई से किसी अच्छे स्कूल में प्रवेश

शिक्षा अधिकारी ने दिए दो विकल्प

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नातिन के एडमिशन के लिए शिक्षा विभाग पहुंचे नाना-नानी

नातिन के एडमिशन के लिए शिक्षा विभाग पहुंचे नाना-नानी

कोरबा. पांच साल की सिया के माता-पिता दुनिया से विदा ले चुके हैं। मां शीला तीन साल पहले कैंसर की वजह से चल बसीं थीं, तो पिता विजय सिंह का स्वर्गवास सिया के जन्म से पहले ही हो चुका है। अभिभावकों के तौर पर अब बूढ़े नाना-नानी ही हैं। जिन्हें अब अपने बाद सिया के भविष्य की चिंता है। फिलहाल वह बालको क्षेत्र के शांतिनगर में रहते हैं।
सिया की नानी शैल सिंह का कहना है कि सिया के अलावा अब हमारा भी कोई नहीं है। दो बेटे थे, दोनो की मौत हो चुकी है। सिया की मां और हमारी बहू की भी तीन साल पहले कैंसर से जूझते हुए मौत हुई। तब से हम ही किसी तरह सिया का लालन पालन कर रहे हैं। जीवन में बहुद दु:ख झेल लिए, हमारे बाद सिया का क्या होगा? अब सिर्फ इसी बात की चिंता है। सुबह से ही हम जिला शिक्षा अधिकारी का इंतजार कर रहे हैं। सुना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बीपीएल वर्ग के बच्चों को अच्छे स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दी जाती है। बस इसिलिए हम चाहते हैं कि सिया को भी बालको के डीपीएस में दाखिला मिल जाए।

विभाग ने दिए दो विकल्प
सिया के नाना-नानी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर अधिकारी का इंतजार कर रहे थे। इतने में डीईओ सतीश पांडे यहां पहुंचे। जिन्होंने वृद्ध दंपति की बात सुनकर उन्हें स्याहीमुड़ी एजुकेशन हब में संचालित अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूल में दाखिला का विकल्प दिया। बताया कि हॉस्टल में भोजन व आवासीय व्यवस्था भी मिलेगी। लेकिन सिया के नाना उसका दाखिला डीपीएस में चाहते हैं। अब वह दो विकल्प मिलने से थोड़ी उलझन में दिखे। बहू व बेटे को खोने के बाद वह सिया को अपने पास ही रखना चाहते हैं। डीईओ ने आरटीई से प्रवेश के लिए ऑनलाईन फॉर्म भरने की हिदायत सिया नाना को दी और कहा कि स्याहीमुड़ी में प्रवेश के विषय में भी विचार करें। जिसके बाद सिया को लेकर वृद्ध दंपती वहां से लौट गए और सोचने के लिए थोड़ा समय लेने की बात कही।

एक हजार रुपए पेंशन और २१ किलो सरकारी चांवल
सिया के नाना सुफल सिंह अब ७६ बरस के हो चुके हैं। बिना छड़ी का सहारा लिए वह चल नहीं पाते। सुफल कहते हैं कि सिया की परवरिश ही अब हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। पूर्व में डोजर ऑपरेटर था, सेवानिवृति के बाद एक हजार का पेंशन हर माह मिलता है। इसके अलावा बीपीएल राशन कार्ड से २१ किलो सरकारी चांवल मिल जाता है। जिससे किसी तरह घर का खर्च चलता है। इस हालत में सिया को अच्छी शिक्षा दे पाना संभव नहीं है। इसलिए हम चाहते हैं शिक्षा विभाग से कुछ मदद मिले।

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