कोरबा. छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की बिजली के लिए एनटीपीसी पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। तीन साल पहले तक साल भर में अधिकतम ३५ सौ करोड़ की बिजली खरीदी जाती थी जो कि अब बढ़कर ५ हजार करोड़ के करीब जा पहुंची है। दरअसल उत्पादन कंपनी के संयंत्र फुललोड पर नहीं चल पा रहे हैं
संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता 2840 मेगावाट है, लेकिन संयंत्र पिछले तीन महीने में कभी भी दो हजार मेगावाट से अधिक का उत्पादन करने में सफल नहीं रहे हैं। जबकि इन तीन महीनों में बिजली की अधिकतम डिमांड 45 सौ मेगावाट के करीब रही है। बिजली की डिमांड कम हो या अधिक, उत्पादन दो हजार मेगावाट के बीच ही रही है। यही वजह है कि डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को डिमांड की पूर्ति करने के लिए एनटीपीसी पर ज्यादा से ज्यादा से निर्भर रहना पड़ रहा है। एनटीपीसी की महंगी बिजली का लोड अब उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
85 फीसदी खर्च बिजली खरीदी में हो रहा
वितरण कंपनी के कुल खर्चे का लगभग 85 प्रतिशत खर्चा पॉवर परचेस में व्यय होता है, जो कि ईंधन के रूप में क्रय मूल्य में कमी अथवा बढ़ोत्तरी के कारण घटता-बढ़ता रहता है। वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने के पूर्व राज्य नियामक आयोग द्वारा विद्युत दर का निर्धारण कर दिया जाता है और ईंधन की दर में बढ़ोत्तरी होने की स्थिति में विद्युत वितरण कंपनी पर पडऩे वाली अतिरिक्त वित्तीय भार को एक निश्चित फ़ार्मूले के अनुरूप व्हीसीए चार्ज के रूप में समायोजित किया जाता है।
मड़वा की एक यूनिट उत्पादन से बाहर, सेंट्रल से ले रहे 19 सौ मेगावाट
उत्पादन कंपनी की ५०० मेगावाट क्षमता की मड़वा की दो नंबर यूनिट बुधवार को उत्पादन से बाहर रही। जबकि अन्य संयंत्रों से कुल २ हजार मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। प्रदेश में बिजली की डिमांड ४१ सौ के करीब थी। सेंट्रल सेक्टर से करीब १९ सौ मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है।
एनटीपीसी के तीनों ही संयंत्र में महंगी बिजली बन रही
एनटीपीसी की तीन प्रमुख संयंत्र कोरबा एसटीपीएस, सीपत और लारा से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बिजली खरीदती है। इन तीनों ही संयंत्र में महंगे कोयले से बिजली बन रही है। इसका सीधा असर खरीदने वाली कंपनी पर पड़ रहा है। इस वजह से लगातार वीसीए चार्ज बढ़ रहा है। मार्च तक वीसीए चार्ज कम होने के आसार नहीं है।