
दो मई को ऊर्जाधानी में दो बड़े आंदोलन की तैयारी
कोरबा . दो मई को ऊर्जाधानी में दो बड़े आंदोलन की तैयारी से प्रशासन की मुश्किल बढ़ी हुई है। पहला आंदोलन भू-विस्थापितों का है, जिन्होंने अपनी मांगों को लेकर गेवरा व दीपका खदान से उत्पादन बंद करने की रणनीति बनाई है।
तो दूसरी तरफ कोरबा से तीन जोड़ी ट्रेन बंद होने के बाद कोरबा विकास समिति ने भी मांग पूरी न होने पर दो मई को ही उरगा में रेल चक्काजाम की योजना बनाई है।
इन आंदोलनो का असर कोयला और रेलवे पर पडऩा तय है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी बीच का रास्ता निकालने में जुटे हुए हैं। इनमें पुनर्वास व नौकरी को लेकर भू विस्थापितों नेे माह भर पहले ही अपने इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली थी। भूविस्थापित हमेशा से यह बात कहते आए हैं कि वर्ष 1978 से लेकर आज तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
कुछ को नौकरी देकर खदान आगे बढ़ा दी जाती है। भूविस्थापित नौकरी का चक्कर लगाते रहते हैं। यही कारण है कि हजारों खातेदार नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उचित व्यवस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास भी बड़ी समस्या है। हर बाद अधिग्रहण के दौरान विस्थापन नियमों को उल्लंघन किया जाता है। इस फेर में कई की उम्र पार होने वाली है।
बाद में उम्र अधिक होने की बात कहकर नौकरी से वंचित कर दिया जाएगा। आखिर वे नौकरी के लिए और कितना इंतजार करेंगे। इसलिए आर या पार की लड़ाई शुरू की जा रही है।
भू-विस्थापितों का ऐसा होगा आंदोलन
ऊर्जाधानी भू- विस्थापित विकास समिति में पांच हजार से अधिक सदस्य हैं। इनका दावा है कि दो मई को सभी गेवरा और दीपका दोनों खदानों में कोयले का डिस्पैच और उत्पादन बंद करा देंगे। खदान अंदर धरना देंगे।
रेल प्रशासन का ढुलमुल रुख देख कर शहरवासी आंदोलन की तैयारी में
पुल की मरम्मत के लिए रेलवे ने कोरबा की तीन जोड़ी ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया है। इससे आक्रोशित होकर ही सर्वदलीय कोरबा विकास समिति का गठन हुआ है।
गुरुवार को प्रशासन की मध्यस्थता के बाद डीआएम व समिति की त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। जो कि लगभग विफल रही। यहां से बंद ट्रेनों का परिचालन पुन: शुरू किए जाने के पक्ष में कोई सहमति नहीं बनी। लेकिन डीआरएम को दो दिन की मोहलत जरूर दी गई। समिति ने कहा कि दो दिन में उचित निर्णय नहीं हुआ तो दो मई को उरगा में रेल चक्काजाम किया जाएगा।
रेलवे प्रबंधन ने तीन जोड़ी बंद ट्रेनों की भरपाई के जो व्यवस्था दी है उसके अनुसार दोपहर 1:10 में रायपुर से पैसेंजर ट्रेन छूटेगी और 4:40 बजे बिलासपुर पहुंचेगी। इसके बाद इस ट्रेन को बिलासपुर में रोक दिया जाएगा। जिसके 50 मिनट बाद 6:30 बजे यह ट्रेन बिलासपुर से छूटकर करीब 8:30 बजे कोरबा पहुंचेगी। फिर इसी ट्रेन को वापस अगली सुबह 6:15 बजे कोरबा-रायपुर पैसेंजर ट्रेन के स्थान पर रायपुर रवाना किया जाएगा।
इस तरह जो ट्रेन पहले से ही सुबह 6:10 बजे चल रही थी। उसे रोक दिया गया है। जबकि इससे बेहतर यह होता कि जो ट्रेन रात के 8:30 बजे कोरबा पहुंच रही है, इसे बंद की गई ट्रेन क्रमांक 68731 गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू के स्थान पर रात के 9 बजे गेवरा रोड से बिलासपुर के मध्य शुरू किया जा सकता है।
इससे रात को बंद की गई ट्रेन भी शुरू हो जाती। इस तरह जो ट्रेन सुबह चल रही है उसे स्टैण्ड करने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां भी चालाकी यह है कि सुबह 6:10 बजे वाली ट्रेन के स्थान पर जिस ट्रेन को अब 6:15 बजे रवाना किया जाएगा, उसका नंबर नहीं बदला गया है।
Published on:
28 Apr 2018 11:14 am
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