
कोरबा. ग्राम पंचायत खोड्डल की मानमती खांडे चार साल सेअपने बेटे ब्रजेश की नौकरी लगने का इंतजार कर रही हैं। ब्रजेश का नाम उन पात्र भूविस्थापितों की सूची में शामिल है,जिन्हें लैंको पॉवर प्लांट में नौकरी दी जानी है लेकिन प्रशासन-प्रबंधन इस सूची में दर्ज लोगों को रोजगार देने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं कर पाया है।
यह दर्द केवल मानमती खांडे का नहीं है बल्कि इस गांव के दर्जनों युवाओं के परिजनों का भी है, जिनकी करोड़ों रुपए की कीमती जमीन अधिग्रहीत कर लैंकों संयंत्र स्थापित किया गया। मानमती खांडे उन ७० ग्रामीणों में से एक हैं,जिन्होंने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर मोहम्मद अब्दुल हक से मिलकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी। पत्रिका टीम इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने वाले ग्रामीणों का दर्द जानने के लिए जब खोड्डल गांव पहुंची तो मुलाकात हुई ६८ साल के हर प्रसाद से। इनकी भूमि अधिग्रहीत की गयी।
जैसे-तैसे बेटी को तो नौकरी मिल गयी लेकिन बेटे की नौकरी के लिए चार साल से इंतजार कर रहे हंै। मुआवजे के बदले मिली रकम खर्च हो चुकी है और अब घर चलाना मुश्किल है। शांति बाई कुर्रे की जमीन जब पहली बार अधिग्रहीत की गयी तो नौकरी मिली लेकिन वर्ष २०१० में अधिग्रहीत की गयी भूमि के एवज में नौकरी नहीं मिली।
ग्रामीणों की पीड़ा है पहली बार भूमि अधिग्रहण करने के लिए प्रशासन के अधिकारियों ने तरह-तरह के सब्जबाग दिखाए थे लेकिन अब इस समस्या का समाधान करने के ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि संयंत्र से निकलने वाला दूषित पानी खेतों को बर्बाद कर दिया है। ऐसी कई एकड़ जमीन अब दलदल हो गई है। इसके बदले में नुकसानी फसल का हर्जाना भी सालों से नहीं दिया जा रहा है। इधर ग्रामीणों की समस्या को लेकर पत्रिका ने कंपनी के सहायक जनसम्पर्क अधिकारी डीके तिवारी ने इस ग्रामीणों के मुद्दे पर अधिकृत रूप से जानकारी देने ने इंकार किया और कहा कि रोजगार व भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं करेंगे।