
टॉपिक ऑफ द डे..
कोरबा . राजनीति में अपराध से जुड़े लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें मर्डर केस से लेकर घृणित कार्य तक करने वाले भी कई शामिल हैं और इन्हें चुनाव लडऩे से रोकने के लिए प्रभावी कानून नहीं है। अब समय आ गया है जब राजनीतिक शुचिता के लिए समाज एकजुट होकर राजनीतिक दलों पर दबाव बनाए कि वे ईमानदार व स्वच्छ छवि वाले लोगों को उम्मीदवार बनाएं। राजनीतिक दल भी उम्मीदवारों का चयन करते समय उनकी छवि जरूर देखें।
नगर निगम के पूर्व आयुक्त अशोक शर्मा ने ये बातें कही। वे रविवार को पत्रिका डॉटकाम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ द डे में पत्रिका के महा अभियान चेंजमेकर बदलाव के नायक स्वच्छ करें राजनीति विषय पर अपने विचार रख रहे थे। शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर राजनीतिक शुचिता की जरूरत क्यों पड़ी ? उन्होंने कहा कि जबसे लोगों में सत्ता का लोभ बढ़ा और धनाढ्य लोगों ने बाहुबल की मदद लेकर इसमें आगे बढ़े तो फिर बाहुबल व धनबल का बोलबोला होने लगा। बाहुबली भी राजनीति में आ गए। उन्हें टिकट मिल गए और धन बल व भय के सहारे राजनीति में प्रवेश कर गए। ऐसे जन प्रतिनिधियों का उद्देश्य अधिकतम कमाई होता है
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनीतिक शुचिता की बात राष्ट्रीय दलों में भी नहीं है और स्थानीय व क्षेत्रीय दलों में तो खैर शुचिता जैसी बात ही नहीं है। यही कारण है कि राजनीतिक दल भी कई बार अपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को टिकट देते हैं,मतदाता के सामने भी सीमित विकल्प हैं। नोटा भी कोई प्रभावी विकल्प नहीं,क्योंकि अगर किसी उम्मीदवार से नोटा में अधिक वोट आ गए तो भी उम्मीदवारों में अधिक वोट पाने वाला व्यक्ति अपराधिक पृष्ठभूमि का है, तो उसे निर्वाचित घोषित किया जाएगा।
इसलिए राजनीतिक शुचिता तभी सुनिश्चित होगी जब लोग जागरूक होकर राजनीतिक पार्टियों पर दबाव डाल सकें कि अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को उम्मीदवार न बनाएं। खासतौर पर जब तक समाज खुद संगठित होकर राजनीतिक अपराधियों के खिलाफ हों। इस काम ? में समय लगेगा लेकिन पत्रिका यह राष्ट्रव्यापी अभियान निश्चित रूप से सराहनीय पहल है। चुनाव आयोग भी इसे लेकर कानून प्रभावी कानून बनाए।
Published on:
08 Apr 2018 07:24 pm
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