
विद्युत कंपनी के दो हजार मकान की ऐसी हालत हर दिन भर-भराकर गिर रहा छज्जा, मरम्मत की बजाए अधिकारी मकान छोडऩे की देते हैं सलाह
कोरबा. विद्युत कंपनी के पूर्व स्थित मकानों की हालत ऐसी हो गई है कि ऐसा कोई दिन नहीं गुजर रहा जब छज्जा भर-भराकर न गिर रहा हो। बीते एक सप्ताह में पांच मकानों के छज्जा गिर चुका है। इसी कॉलोनी में सिविल विभाग के अधिकारियों का आवास व दफ्तर भी है। रोजाना स्थिति से वाकिफ हो रहे हैं इसके बाद भी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। उल्टे कर्मचारियों को मकान छोडऩे की सलाह दी जा रही है।
सीएसईबी कोरबा पूर्व स्थित कॉलोनी १९८४ में तैयार हुई थी। ३४ साल पुराने इस कॉलोनी में कुल २५८६ मकान हैं। इसमें दो हजार मकान एनएफ, एसएफ, एसई, एनई, एनडी के मकान शामिल हंै। जबकि एसडी, एनसी सहित ऑफिसरों के मकान बी-टाइप में ५०० से अधिक मकान हैं। कॉलोनी के मकानों की जर्जर हालत इस कदर हो चुकी है कि कर्मचारी व उनका परिवार सिर्फ मजबूरी मेें रह रहा है।
मकान के छज्जे कई जगह से टूट रहे हैं। कहीं बालकनी दरकने लगी है तो कुछ जगह कमरों के अंदर का प्लास्टर टूटने लगा है। बारिश आते ही कर्मचारियों के लिए जर्जर आवास आफत बनने लगते हैं। बीते एक सप्ताह में एसएफ व एनएफ के पांच मकान के भीतर व बाहर बालकनी के छज्जे गिर चुके हैं। इससे पहले भी छज्जे गिरे लेकिन चार दिन पहले एसएफ ९२२ के बालकनी का आधा छज्जा पूरी तरह से गिर गया। १० इंच की जगह महज ४ इंच का ही छज्जा अब बचा है। जबकि कुछ जगह पर तो पूरा का पूरा छज्जा ही गिर गया है।
सुखद पहलू रहा है कि उस समय कर्मचारी परिवार घर पर नहीं था। इसी तरह कई अन्य मकानों की हालत ऐसी ही है। कॉलोनी में सफाई की स्थिति सबसे अधिक बदहाल है, सफाई का ठेका कई महीनों तक नहीं किया गया था। जब किया गया तो उसमेें ठेकेदार द्वारा मनमर्जी की जा रही है। कॉलोनी में सिर्फ यूनियन नेताओं व अधिकारियों के आवास वाले क्षेत्रों में ही सफाई कराई जाती है।
18 साल पहले हुई थी रंगरोंगन, तब से अब तक बदरंग कॉलोनी
18 साल पहले कॉलोनी में रंगरोंगन कराया गया था। इसके बाद से अब तक कॉलोनी में इस काम के लिए टेंडर तक नहीं किया गया है। आठ साल पहले कॉलोनी की कुछ सड़कों पर टायरिंग कराई गई थी, जो कुछ माह में ही उखड़ गई। बाद में मरम्मत कराई गई थी। स्ट्रीट लाइटों की हालत भी खराब है, आए दिन लाइट बंद रहती हैं।
जितने का मेंटनेंस नहीं, उससे तीन गुना अधिक सेटअप पर खर्चा
कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सफाई, मकानों के मरम्मत के लिए पूरा सेटअप बनाया गया है। यहां पदस्थ कर्मचारियों की मॉनिटरिंग के लिए एई, ईई, डिजाइनर, एसई तक के अधिकारियों को रखा गया है। साल भर में कम से कम दो से तीन करोड़ रूपए का सेटअप खर्च है। जबकि मेंटनेंस में बजट सालाना एक से डेढ़ करोड़ रूपए ही है।
-कॉलोनी की जर्जर हालत पर कंपनी का बिल्कुल ध्यान नहीं है। आए दिन छज्जे गिर रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायत सुनी नहीं जा रही है। सीवरेज, सफाई से लेकर स्ट्रीट लाइट तक बंद रहती है- महेंद सिंह चौहान, पार्षद
Published on:
03 Jul 2018 12:24 pm
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