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देश के 736 बांधों की मरम्मत को चाहिए 10 हजार करोड़

चम्बल पर बने बांध हर साल करोड़ों की कमाई करके सरकार को दे रहे हैं। सबसे सस्ती बिजली पानी से ही बन रही है, लेकिन इसके विपरीत इन बांधों की मरम्मत व रखरखाव के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान राशि मिलती है। विभाग के पास न पर्याप्त तकनीकी स्टाफ है, न अन्य कर्मचारी हैं।

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कोटा. चम्बल पर बने बांध हर साल करोड़ों की कमाई करके सरकार को दे रहे हैं। सबसे सस्ती बिजली पानी से ही बन रही है, लेकिन इसके विपरीत इन बांधों की मरम्मत व रखरखाव के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान राशि मिलती है। विभाग के पास न पर्याप्त तकनीकी स्टाफ है, न अन्य कर्मचारी हैं। हालांकि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बांधों की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है, लेकिन पुराने बांधों की समय-समय पर मरम्मत की आवश्यकता है। देश के सात राज्यों के 736 बांधों की मरम्मत के लिए 10 हजार 211 करोड़ रुपए की जरूरत है। राजस्थान के 189 बांधों के लिए 965 करोड़ की जरूरत है, राज्य में 22 प्रमुख बड़े बांध हैं और 278 अन्य बांध हैं। इनके अलावा भी अनेक छोटे बांध हैं। बांधों की सुरक्षा और कार्य निष्पादकता में सुधार के लिए केन्द्र सरकार ने अप्रेल 2012 से मार्च 2021 तक विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना पूरी की है। इस कार्यक्रम के तहत 7 राज्यों के 223 मौजूदा बांधों पर 2567 करोड़ रुपए व्यय करके रख रखाव के कार्य कराए। पहला चरण पूरा होने के बाद अब दूसरे और तीसरे चरण की 10 हजार 211 करोड़ की लागत से 19 राज्यों के 736 बांधों के पुनर्वासन की योजना तैयार की गई है। यह योजना 10 साल में पूरी होगी। अधिकतर बांध राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। चम्बल नदी पर बने बांध 50 साल से ज्यादा पुराने हैं। चम्बल नदी पर कोटा बैराज का निर्माण 1960 में और राणाप्रताप सागर का निर्माण 1970 में पूरा हुआ। वहीं जवाहर सागर का निर्माण 1972 में पूरा हुआ।
बांधों की सुरक्षा के लिए यह भी प्रावधान
केन्द्र सरकार ने बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख रखाव के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 बनाया है, जो 30 दिसम्बर 2021 से प्रभावी है। इस अधिनियम का उद्देश्य बांध की विफलता से संबंधित आपदाओं को रोकना और उनके सुरक्षित कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र प्रदान करना है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण भी बांधों की सुरक्षा के लिए कार्य करते हैं।

चम्बल नदी पर बने बांधों को सुरक्षा की दृष्टि से कोई खतरा नहीं है। रख रखाव नियमित प्रक्रिया है। विश्व बैंक के सहयोग से मरम्मत संबंधित कार्य कराए जाएंगे। केन्द्र की टीम एक बार मौका निरीक्षण कर चुकी है।
- राजेन्द्र पारीक, मुख्य अभियंता, जल संसाधन, कोटा

राज्य-बांधों की संख्या- अनुमानित खर्च
आंध्रप्रदेश-31-667
छत्तीसगढ़-5-133
गोवा-2-58
गुजरात-6-400
झारखंड-35-238
कनार्टक-41-612
केरल-28-316
मध्यप्रदेश-27-186
महाराष्ट्र-167-940
मणिपुर-2-311
मेघवालय-6-441
ओडिशा-36-804
पंजाब-12-442
राजस्थान-189-965
तमिलनाडु-59-1064
तेलंगाना-29-545
उत्तरप्रदेश-39-787
उत्तराखंड-6-274
पश्चिम बंगाल-9-84
बीबीएमबी-2-230
डीवीसी-5-144
सीडब्ल्यूसी-570
कुल-736-10,211