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झूला मार्केट में 9 हजार फीट जमीन कहां गई, पता नहीं
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झूला मार्केट में 9 हजार फीट जमीन कहां गई, पता नहीं

राष्ट्रीय दशहरा मेला : मेला समिति ने निगम प्रशासन की कार्य शैली पर उठाए सवाल
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कोटा. नगर निगम प्रशासन और मेला समिति की ओर से पिछले दो माह से दशहरा मेले में दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता की बातें की जा रही थी, लेकिन आवंटन की प्रक्रिया शुरू होते ही बंदरबांट शुरू हो गई है। दुकानों के आवंटन में चल रही गड़बडिय़ों के चलते मेला समिति और निगम आयुक्त आमने-सामने हो गए हैं। मेला समिति ने आयुक्त से दुकानों के आवंटन का हिसाब मांगा है।

मेला समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा की अध्यक्षता में सोमवार को मेला प्रकोष्ठ में हुई बैठक में सदस्यों ने दुकानों के आवंटन में निगम प्रशासन की मनमानी करने तथा बैठकों के निर्णयों की पालना नहीं करने को मुद्दा छाया रहा। बैठक के बाद सदस्यों ने आयुक्त को ज्ञापन देकर स्पष्ट कहा कि निगम प्रशासन मेले के आयोजन में कतई सहयोग नहीं कर रहा है। दुकानों के आवंटन में जिस तरह के मामले में सामने आ रहे हैं, उससे समिति की बदनामी हो रही है। मेला व्यापारी दुकानों के लिए चक्कर लगा रहे हैं,जबकि कई व्यापारियों को दो-तीन जगह दुकानें आवंटित कर दी गई है । कई दुकानों के नक्शे गायब कर दिए गए हैं। बैठक में सदस्य नरेन्द्र हाड़ा, महेश गौतम लल्ली, प्रकाश सैनी, भगवान स्वरूप गौतम, कृष्णमुरारी सामरिया, मीनाक्षी खण्डेलवाल, मोनू मेघवाल मौजूद थी।

झूला मार्केट की जगह कहां है

समिति अध्यक्ष मित्रा व लल्ली ने कहा कि झूला मार्केट में 8 व 9 नम्बर का झूला, जिसका एरिया करीब नौ हजार वर्ग फीट है। पिछले तीन साल से नीलामी के आधार पर आवंटित किया जा रहा था। इस बार नक्शे में यह जगह ही गायब कर दी गई है। यह जगह कहां गई इसका आयुक्त हिसाब दें।

जानबूझकर देरी

सदस्य हाड़ा व सैनी ने कहा कि अगले महीने के प्रथम सप्ताह तक आचार संहिता लगने की चर्चा है। इस कारण निगम प्रशासन जानबूझकर मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के टेण्डर खोलने व अन्य कार्यों में देरी कर रहा है, ताकि आचार संहिता के बाद मेला समिति का दखल सीमित हो जाएगा।

यह उठाए सवाल