
कोटा . नगर निगम में सफाईकर्मी भर्ती घोटाले में फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी हासिल करने वालों पर अब गाज गिरना शुरू हो गई है। आयुक्त ने शुक्रवार को आदेश जारी कर छह नए सफाई कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। अन्य शिकायतों की जांच चल रही है। और भी कर्मचारियों पर गाज गिरने की संभावना है। निगम आयुक्त जुगल किशोर मीणा ने बताया कि नवीन सफ ाई कर्मचारी भर्ती- 2018 के तहत भर्ती किए गए सन्तोष बाई, कमलेश, घासीलाल, महावीर, प्रेम देवी व मीना बाई के खिलाफ शिकायत प्राप्त हुई थी। निगम प्रशासन ने इनके दस्तावेजों की जांच की। इसमें दस्तावेज गलत पाए गए। इस पर इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। गौरतलब है कि कार्रवाई के दायरे में फंसे दो नव चयनित सफाई कर्मचारियों ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया था। पढ़ें छह ञ्च पेज 09
विस्तृत जांच होगी
आयुक्त ने बताया कि इसके अलावा इसी भर्ती में चयनित निगम में पहले से ही कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत अजहर, दीपक नामा, मुकेश गालव, महेन्द्र सिंह, मनोज विश्वास व सबीना की ज्वाइनिंग पर भी फि लहाल रोक लगा दी है। इनके मामले की विस्तृत जांच के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। इसमें आयुक्त के कार्यालय में कम्प्यूटर ऑपरेटर, वरिष्ठ लिपिक व अन्य कर्मचारियों के रिश्तेदार हैं जो 8 से 10 साल से निगम में संविदा पर काम कर रहे हैं। हालांकि निगम में चर्चा भी थी कि जांच के नाम पर निगम प्रशासन इन्हें बचाने में जुटा हुआ है।
डीएलबी ने नहीं की शुरू
घोटाले की परते पत्रिका में लगातार उधडऩे के बाद महापौर महेश विजय ने भी उच्च स्तरीय जांच के लिए डीएलबी निदेशक को पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक डीएलबी ने जांच शुरू नहीं की है। यह मामला एसीबी में भी पहुंच गया है।
पत्रिका ने किया था उजागर
राजस्थान पत्रिका ने दस्तावेजी सबूतों के आधार पर सफाई भर्ती घोटाला उजागर किया था। पत्रिका की ओर से लगातार प्रमुखता से घोटाले की खबरें प्रकाशित होने पर तत्कालीन आयुक्त ने उपायुक्त मुख्यालय श्वेता फगेडिया व तत्कालीन उपायुक्त राजेश डागा को जांच सौंपी थी। दोनों उपायुक्तों की रिपोर्ट पर यह कार्रवाई हुई है।
Published on:
04 Aug 2018 05:10 pm
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