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ये ना समझना नाकारा हैं, हम अभी भी जलता अंगारा हैं

देर रात तक जमा कवि सम्मेलन

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Shailendra Tiwari

Jan 26, 2017

कोटा. कोटा दक्षिण सद्भावना समिति की ओर से महावीर नगर स्थित घटोत्कच सर्किल के पास बुधवार रात एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

कवि सम्मेलन में देशभक्ति के साथ-साथ राजनीति की गिरती मर्यादाओं पर कटाक्ष कर कवियों ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। देश भक्ति की कविताओं ने जोश दोगुना कर दिया।

कवि अतुल कनक ने 'ये ना समझना नाकारा हैं, हम अभी भी जलता अंगारा हैं..., कविता से पड़ोसी देश की सीमा पार से चल रही करतूतों का मुंह तोड़ जवाब दिया।

निशामुनि गौड़ ने देश की सैनिकों पर कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि हम रंग में है वो रण में...., भीलवाड़ा के दीपक पारीक ने 'ये कालेधन हाथों में वतन को बेचने वालो, गुलाबी नोट आया है, गुलाबी साल आया है, नोटबंदी पर हास्य व्यंग्य की कविता सुनाकर जमकर वाहवाही लूटी।

कवि मीनू शर्मा ने शहीदों के नाम पर पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा कि वतन के लिए ही जीना, वतन के लिए ही मरना, नहीं सीखा झुकना, रुकना, चमन में चैन की खुशबू, अमन जिन की बदौलत शहीदों की शहादत सदा मन से नमन करना..., कविता प्रस्तुत की।

कुछ कवियों ने एे मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी..., जहां डाल-डाल पे सोने की चिडि़या करती बसेरा, ओ भारत देश है मेरा... देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। सम्मेलन में कवि हरिओम पंवार, दुर्गादान सिंह गौड़, अजात शत्रु समेत अन्य कवियों ने कविता पाठ किया।

कार्यक्रम में विधायक संदीप शर्मा, चन्द्रकांता मेघवाल, यूआईटी चेयरमैन रामकुमार मेहता, जयवीर सिंह समेत, पार्षद महेश गौतम लल्ली समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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