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चंबल रिवर फ्रंट पर घंटी की ढलाई की 90 फीसदी काम पूरा

कोटा. हैरिटेज चंबल रिवर फ्रंट पर दुनिया की सबसे बड़े घंटी की ढलाई का काम बुधवार को वर्ल्ड बिगेस्ट बेल ऑन रिवर फ्रंट के प्रोजेक्ट डिजाइनर देवेन्द्र आर्य के निर्देशन में शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा।  

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कोटा

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Mukesh Sharma

Aug 16, 2023

कोटा. हैरिटेज चंबल रिवर फ्रंट पर दुनिया की सबसे बड़े घंटी की ढलाई का काम बुधवार को वर्ल्ड बिगेस्ट बेल ऑन रिवर फ्रंट के प्रोजेक्ट डिजाइनर देवेन्द्र आर्य के निर्देशन में शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा।

रिवर फ्रंट पर दुनिया की सबसे बड़ी घंटी की सभी तैयारियां पूरी कर करने के बाद शनिवार से इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। इसके तहत घंटी के बनाए गए सांचे की टेस्टिंग शुरू की गई। इस टेस्टिंग में लीकेज से लेकर धातुओं को घंटी के सांचे में डालने से लेकर ढलाई पूरी होने तक सभी पहलूओं की जांच की गई। ट्रायल सफल रहने के बाद रविवार को भट्टियों को जलाने के लिए बर्निंग हीटिंग की प्रकिया शुरू की गई। इस दौरान शाम 7 बजकर 24 मिनट पर सफल बर्निंग हीटिंग की प्रकिया सफलता पूर्वक पूरी की गई।

बेल डिजाइनर आर्य ने बताया कि बुधवार को घंटी की ढलाई काफी ऊंचे तापमान पर होने के कारण पूरी जगह को सील किया गया। इसके बाद बुधवार सुबह घंटी के सांचा स्थल को भी हीट अप किया गया। इसके बाद घंटी के सांचे के तीन ओर लगी 35 भट्टियों में घंटी के लिए तैयार विशेष धातुओं को पिघलाया गया और चार विशेष पात्रों के जरिए इन्हें क्रेनों से उठा कर सांचे में डालने का काम शुरू किया गया, जो शाम तक चलता रहा।

थरमीट रिएक्शन की प्रकिया से ढाली घंटी

घंटी की ढलाई के लिए थरमीट रिएक्शन प्रकिया अपनाई गई। इसमें पूरे क्षेत्र का तापमान 900 डिग्री हो गया। इसे बढ़ा कर करीब 3000 डिग्री तक ले जाकर घंटी की ढलाई की गई। इस प्रकिया में करीब 20 हजार लीटर डीजल का उपयोग किया गया।

बढ़ाया घंटी का वजन

आर्य ने बताया कि घंटी का वजन 79 हजार किलो से लेकर 83 किलो ग्राम तक हो सकता है। इससे पहले दुनिया की दो सबसे बड़ी घंटी में से एक घंटी टूट गई थी। ऐसे में घंटी पर जहां पेंडूलम टकराएगा। उस स्थान को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए अलग से धातु लगाई जाएगी। इस घंटी को मैनुअली बजाया जा सकेगा। रात में इसकी आवाज आसानी से आठ किलोमीटर तक पहुंच सकेगी। इतनी रेंज होने के बावजूद इसकी ध्वनि कर्णप्रिय बनी रहेगी।

मजबूती के लिए प्राकृतिक तरीके से ठंडी होगी घंटी

घंटी की ढलाई का काम पूरा होने के बाद इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाएगा। इससे यह घंटी कई दिनों में जाकर ठंडी होगी। प्राकृतिक रूप से ठंडी होने के कारण घंटी काफी मजबूत होगी। इसके बाद घंटी के सांचे हटाकर इसकी फिनिशिंग की जाएगी इसके बाद इसे घंटी के लिए चंबल रिवर फ्रंट पर बनाए गए हैंगर पर क्रेनों की सहायता से टांगा जाएगा। घंटी के निर्माण के बाद इसके तैयार होने की केलकुलेशन की जाएगी। इस आधार पर ही रिवर फ्रंट की उद्घाटन की तारीख तय की जाएगी।