वर्तमान में भामाशाह मंडी के नाम से जाने जाने वाले परिसर में जिन्सों की आवक 1997 में शुरू हुई थी। यानी, इसी साल एरोड्राम से धानमंडी यहां स्थानांतरित होकर आई थी। गुजरते सालों के बीच यहां आवक बढ़ती गई। अब हालत यह कि, रबी व खरीफ सीजन में विभिन्न कृषि जिंसों की बम्पर आवक के चलते यहां हर साल आए दिन जाम के हालात बनते हैं। ऐसे में मंडी प्रशासन ने मंडी परिसर व बारां-झालावाड़ फोर लेन के बीच की वन विभाग की 74 हैक्टेयर जमीन मंडी प्रशासन को स्थानांतरित करने की जिला प्रशासन से 2 साल पहले मांग की थी।