
भैंसरोडगढ़ अभयारण्य स्थित रिलोकेशन सेटर पर वाच टावर।
कोटा/रावतभाटा.
राजस्थान में वन्यजीवों को बचाने और उनकी रक्षा के लोगों को प्रेरित करने की जैसे मुहिम ही चल पड़ी है। अब अणु नगरी के नाम विख्यात रावतभाटा के पास स्थित भैंसरोडगढ़ वन्यजीव अभयारण्य प्रशासन इस दिशा में नई पहल करने जा रहा है। अभयारण्य प्रशासन का यहां क्रॉकोडाइल व वल्चर प्वाइंट (गिद्द) विकसित करने पर फोकस है। इसकी गंभीर कवायद चल रही। माना जा रहा है कि प्वाइंट्स के विकसित होने से देसी-विदेशी पर्यटक तो बढ़ेंगे ही, क्षेत्र को पहचान भी मिलेगी। वर्तमान में अभयारण्य में सालाना औसतन 2 हजार 500 से 3 हजार पर्यटक आते हैं। इन प्वाइंट्स के विकसित होने से पर्यटकों में वृद्धि होगी। खास बात यह कि इन पर्यटकों को अभयारण्य में वन्यजीवों की रक्षा करने को प्रेरित किया जाएगा, पर्यावरण में इनकी भूमिका और मनुष्य के साथ अस्तित्व की उपयोगिता भी बताई जाएगी।
अभयारण्य के अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में यहां 200 से ज्यादा क्रॉकोडाइल हैं। एक क्रॉकोडाइल प्वाइंट भैंसरोडगढ़ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में रिलोकेशन सेन्टर पर है। यहां पर कई पर्यटक आते हैं। यहां क्रॉकोडाइलों को देखने के लिए 36 फीट एक वॉच टॉवर बना हुआ है। इस टॉवर पर चढ़कर पर्यटक नदी में कॉकोडाइलों को देखते हैं। अब एक अन्य क्रॉकोडाइल प्वाइंट ब्रिज क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। यहां भी काफी संख्या में कॉकोडाइल देखे गए हैं। वल्चर प्वाइंट भी होगा विकसित
बनेगा वल्चर प्वाइंट
यही नहीं, अभयारण्य क्षेत्र में एक वल्चर प्वाइंट भी विकसित किया जाएगा। यह भी ब्रिज क्षेत्र में विकसित होगा। अभयारण्य के अधिकारियों का कहना है कि गिद्द प्रजाति धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। यह बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। लेकिन अभयारण्य में करीब 70 से 80 गिद्द हैं। उम्मीद है कि इनको देखने भी काफी पर्यटक आएंगे। एक वॉच सेन्टर विकसित किया जाएगा। इस पर करीब 4 लाख का खर्च आएगा। इस पर चढ़कर पर्यटक गिद्दों को देख पाएंगे। अभयारण्य की ओर से प्रस्ताव बनाकर कोटा वन मंडल को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
वन्यजीवों की रक्षा का देंगे संदेश
अभयारण्य के अधिकारियों का कहना है कि इन प्वाइंट्स के विकसित होने से पर्यटक बढ़ेंगे। इस दौरान पर्यटकों को वन्यजीवों का महत्व बताया जाएगा। इनकी रक्षा का संदेश दिया जाएगा। बताया जाएगा कि वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुंचाएं। इनके पास भी नहीं जाएं।
अलग से दूरबीन दी जाएगी
इन प्वाइंट्स को विकसित करने के बाद पर्यटक आना शुरू हो जाएंगे। अत: उन्हें वाच टॉवरों पर चढ़ाकर एक अलग से दूरबीन दी जाएगी, जिससे वे वन्यजीवों को देख सकेंगे।
प्रस्ताव भेज दिए हैं
पत्रिकाडॉटकॉम से बातचीत में भैसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य के रेंजर दिनेश नाथ ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए क्रॉकोडाइल व वचर प्वाइंट्स विकसित किए जाएंगे। इसको लेकर कोटा वन मंडल में प्र्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।
Published on:
02 Aug 2019 07:00 am

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