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विस्फोट के साथ फटा नलकूप, पानी के साथ 40 फीट ऊंचे तक बरसे मिट्टी और पत्थर, यह थी भूगर्भीय वजह

40 फीट ऊपर तक फटती जलधारा और साथ में बरसते पत्थर मिट्टी ने सांसें थामी हुई थी। आखिर हड़कम्प के बाद ड्रिलिंग बंद करने पर ही सभी ने राहत की सांस ली।
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विस्फोट के साथ फटा नलकूप, पानी के साथ 40 फीट ऊंचे तक बरसे मिट्टी और पत्थर, यह थी भूगर्भीय वजह

कोटा.

न यहां ज्वालामुखी फटी और ना ही कोई तूफान आया, फिर भी गांव में सभी हतप्रभ थे उन 20 मिनट के हर लम्हे में। तेज विस्फोट सी आवाज के साथ 40 फीट ऊपर तक फटती जलधारा और साथ में बरसते पत्थर मिट्टी ने सांसें थामी हुई थी। आखिर हड़कम्प के बाद ड्रिलिंग बंद करने पर ही सभी ने राहत की सांस ली।
दरअसल, कोटा जिले के चेचट कस्बे के निकटवर्ती ग्राम बड़ौदिया कलां में शुक्रवार को एक मकान में नलकूप खुदाई के दौरान करीब तीन सौ मीटर दूर अन्य नलकूप में 40 फीट ऊंची जलधारा फूट पड़ी। इस नलकूप में लगी विद्युत मोटर भी जलधारा के साथ उखड़ उछली। घटना से हर कोई हतप्रभ रह गया, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। विशेषज्ञों ने भूगर्भ में बोरिंग के दौरान बने हवा के दबाव को इसकी वजह माना है।
मिली जानकारी के अनुसार बड़ौदिया कलां में विद्यालय के समीप स्थित किशन लाल लोधा के मकान के बाहर मशीन द्वारा नलकूप खुदाई का कार्य किया जा रहा था। करीब 250 फीट खुदाई के दौरान यहां प्रेशर से पानी आ गया। लेकिन इसी दौरान इस बोरिंग स्थल से करीब तीन सौ मीटर दूर स्थित चतुर्भुज राठौर के मकान में पहले से लगी ट्यूबवैल में दबाव बढऩे से विद्युत मोटर व पाइप लाइन उखाड़ती 40 फीट ऊंची तक जलधारा फूट पड़ी। इससे आसपास के मकानों में पानी भर गया। इतना ही नहीं, पानी के साथ मिटटी व पत्थर भी उछलकर आए। यह नजारा 20 मिनट तक चला। सूचना फैलते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर उमड़ पड़ी। बाद में जब बोरिंग कर रही मशीन को बन्द करवाने पर जलधारा स्वत: बंद हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि जोरदार आवाज के साथ फूटी इस जलधारा के साथ मिट्टी व पत्थर भी बराबर निकलते रहे। पत्थर के टुकड़े काफी दूर तक गिरे। घटनाक्रम में कोई हताहत नहीं हुआ।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
कारण: जमीन में बढ़ा हवा का दबाव- जलदाय विभाग के सहायक अभियंता बलभद्र शर्मा ने बताया कि नलकूप खुदाई के दौरान जमीन में हवा का दबाव बना रहता है। हवा को बाहर निकलने की जगह नहीं पाने की वजह से प्रेशर तेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में हवा बाहर निकलने का रास्ता खोजती है। यदि खुदाई वाले स्थान के आसपास कोई दूसरा नलकूप हो तो हवा उसके सहारे बाहर निकलने का रास्ता बनाती है। इसी बीच पानी का सारा प्रेशर उस नलकूप में चला जाता है। और, ऐसी घटनाएं हो जाती हैं।

निवारण: तुरंत ड्रिलिंग बंद हो - वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक प्रवाल अथैया ने बताया कि कई बार एयर लोस होने से इस तरह की स्थितियां पैदा हो जाती हैं। आसपास बोरिंग होने से ये इंटरनल कनेक्ट हो जाते हैं। इस स्थिति में सबसे पहले ड्रिलिंग को बंद कर देना चाहिए, वहीं आसपास के लोगों को भी इससे अवगत कराना चाहिए। बेहतर रहे लोग पहले से ही सावधान रहें। बोरिंग करने से पहले भी आसपास की रेडियस में सूचना हो तो ठीक रहे। समीपवर्ती नलकूप वाले अलर्ट रहें।