
अब ऊंटनी के दूध से बढ़ेगी बच्चों की लंबाई, नाटापन होगा खत्म, राजस्थान में पहली बार होगा प्रयोग
हकीम पठान@ बारां. जिला प्रशासन व महिला एवं बाल विकास विभाग ( Women and Child Development Department ) की ओर से जिले के आदिवासी सहरिया क्षेत्र के बच्चों को ( Tribal Children ) पोषाहार के रूप में ऊंटनी का दूध दिया जाएगा। ( Camel Milk ) यह दूध पीने से बच्चों में नाटापन की समस्या से निजात मिलेगी। ( camel milk will increase children's length ) इसके अलावा बच्चों को कुपोषण की स्थिति से निकालकर सेहतमंद बनाने में मदद मिलेगी। ( malnutrition child ) लहाल बारां जिले में ही जिला प्रशासन के स्तर पर इस तरह का नवाचार करने का प्रयास किया जा रहा है। ( malnutrition ) इसके लिए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग उदयपुर को प्रस्ताव भेजे गए हंै। वहां से यह प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजे जाएंगे। ( tribal development department udaipur )
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फिलहाल जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों ( anganwadi center rajasthan ) पर कुपोषित बच्चों को गर्म पोषाहार के रूप में खिचड़ी व दलिया तथा सप्ताह में एक बार बेबी मिक्स दिया जा रहा है। ( Malnutrition in children ) इसके अलावा पोषण मिशन के तहत अक्टूबर माह में अतिगंभीर कुपोषित बच्चों ( severely malnourished child ) को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ( Medical and Health Department ) की ओर से पोषाहार के पाऊच 'अमृत पोषण' दिए गए हंै। एक बच्चे को दस दिनों तक यह पाऊच दिए गए। इससे सेहत में सुधार नजर आ रहा है।
देंगे अमूल का सौ एमएल दूध
जिला प्रशासन की ओर से ऊंटनी के दूध का इंतजाम करने के लिए पहले बीकानेर में स्थित केन्द्र सरकार के कैमल फार्म से सम्पर्क किया, (Camel Farm Bikaner ) लेकिन जिले की आवश्यकता के मुूताबिक वहां दूध उपलब्ध नहीं होने पर अब प्रमुख दूध विक्रेता कम्पनी अमूल से सम्पर्क किया गया है। ( camel milk amul ) अमूल की ओर से दो सौ एमल के पैकिट में दूध उपलब्ध कराया जाएगा। एक पैकिट दो बच्चों को दिया जाएगा। इससे प्रत्येक बच्चे को सौ-सौ एमएल दूघ उपलब्ध होगा। अमूल की ओर से यह दूध 80 रुपए प्रति लीटर की दर से ा उपलब्ध कराया जाता है, ( amul milk company ) लेकिन इस प्रस्ताव पर उनकी ओर से एक रुपए कम में दूध देने का भरोसा दिया गया है।
गर्भवती व धात्रियों को देंगे लड्डू
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं व धात्री महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए भी उनको दिए जा रहे पोषण में बदलाव कर लड्डू के रूप में दिए जाने के प्रस्ताव भेजे हुए हैं। इसमें विशेषकर छत्तीसगढ़ में उत्पादन होने वाले रागी के आटे में गुड़ व घी मिलाकर लड्डू तैयारी किए जाएंगे। यह लड्डू जिले में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ही बनवाए जाएंगे। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों को भी रोजगार मिलेगा। सामान्यतया निर्धनता के चलते सहरिया जनजाति की महिलाओं को प्रसव के दौरान अधिक मात्रा में देसी घी समेत पोष्टिक आहार कम मात्रा में मिलता है। इससे बच्चे भी कमजोर पैदा होते हैं।
जिले के सहरिया जनजाति के बच्चों में कुपोषण के व नाटापन की समस्या दूर करने के लिए उन्हें नवाचार के तौर पर उन्हें ऊंटनी का दूध दिया जाएगा। इसके प्रस्ताव तैयार कर जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग उदयपुर को प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनकी जल्द स्वीकृति की उम्मीद है।
इन्द्र सिंह राव, जिला कलक्टर, बारां
Published on:
28 Nov 2019 08:00 am
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