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टिप्पणी : शिक्षा परिसरों की इस सड़ांध को खत्म करो

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय

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शिक्षा परिसरों की इस सड़ांध को खत्म करो

टिप्पणी : शिक्षा परिसरों की इस सड़ांध को खत्म करो

पंकज श्रीवास्तव

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने गुरु—शिष्य परंपरा पर दाग लगा दिया है। अव्वल तो ऐसे लोगों को गुरु कहना ही उन तमाम लोगों का अपमान है, जिन्होंने शिक्षा के लिए पूरा जीवन कुर्बान कर दिया। पर क्योंकि ऐसे लोग शिक्षा व्यवस्था में शामिल हो चुके हैं और गुरु का दर्जा लेकर व्यवस्था पर कुठाराघात कर रहे हैं तो ये सवाल तो उठेगा कि ऐसी दूषित मानसिकता के लोग इतनी उंचाई तक पहुंच कैसे जाते हैं। न सिर्फ पहुंच जाते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम को अपने हाथ में लेने का दावा करते हैं।


पुलिस की जांच में जो ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई हैं, उनमें एक आदमी दावा कर रहा है कि उसके पास बहुत पैसा है। इतना ही नहीं वीसी यानी वाइस चांसलर और डीन भी उसके ही आदमी हैं। ऐसी बातें करने वाला व्यक्ति पुलिस के अनुसार राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का प्रोफेसर है। जो भी बातें पुलिस की जांच में आए ऑडियो में सुनाई देती हैं वो झकझोर देती हैं। कैसे कोई इतने बड़े संस्थानों की व्यवस्थाओं का मखौल बना सकता है। पास करने के एवज में पहले छात्रों को फंसाता है और उनके साथ मिलकर छात्राओं को फांसने के लिए एक रैकेट बना लेता है। बात पुलिस और मीडिया में आई तब हंगामा हुआ। क्या आरटीयू परिसर में ये बातें इससे पहले किसी के कानों तक नहीं पहुंचीं। ऐसा हो ही नहीं सकता कि वहां के प्रोफेसर्स और विद्यार्थियों को इन कारगुजारियों की भनक न हो। तो क्यों चुप्पी साधे रहते हैं लोग। क्या अपने किसी की बारी आने का इंतजार करते हैं। जब तक आग अपने घर नहीं पहुंचती हमें क्या।

क्या ऐसा रवैया इस सड़ांध को और बढ़ाने का काम नहीं कर रहा। ऐसी दूषित मानसिकता के लोग कुछ ही होते हैं। पर चुप रहकर इन्हें बढ़ावा देने वाले अनेक। और इन अनेक लोगों का कसूर भी बहुत ज्यादा है। कोटा जैसे शहर में भविष्य के सपने बुन रही लाखों आंखों के सामने जब ऐसे समाचार गुजरेंगे तब शिक्षा व्यवस्था पर कितनों का भरोसा टूटेगा। उसकी भी फिक्र कर लें। अभी भी वक्त है शिक्षा परिसरों के ऐसे सभी भेडिय़ों को खोजकर हवालात के पीछे धकेलें। ये सफाई का वक्त है।