चंबल परियोजना समिति की बैठक मंगलवार को सीएडी सभागार में आयोजित की गई। बैठक में नहरों के रेगुलेशन में लगे कर्मचारियों के भुगतान का मुद्दा छाया रहा। शोभागपुरा समिति अध्यक्ष अर्जुनराम ने कहा कि नहरों के रेगुलेशन के लिए ठेका हो जाते है, लेकिन ठेकेदार काम नहीं करता। यह काम मनरेगा से कराया जाता है और भुगतान ठेकेदार को कर दिया जाता है। कुलदीप सिंह ने कहा कि ऐसे ठेकेदारों को ब्लेक लिस्टेड किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खातौली वितरिका में 20 लोगों को 1.90 लाख का भुगतान कर दिया।
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समिति सदस्य व जल वितरण समिति के अध्यक्ष नहरों पर हो रहे पक्के निर्माण कार्यों की क्वालिटी, सीएडी की जमीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अधिकारियों पर खूब बिफरेे। बैठक में जुलाई से सितंबर तक भी नहरों में पानी देने, सदस्यों के प्रशिक्षण, निर्माण की उच्च स्तरीय जांच और बिना समिति अध्यक्ष की एनओसी के ठेकेदार को भुगतान नहीं करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक में सभापति सुनील गालव ने कहा कि राज्य सरकार ने 2012 में चंबल की नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए 1274 करोड़ रुपए दिए थे। अब 10 साल बाद भी ये काम पूरे नहीं हो पाए हैं। यह विषय काडा की बैठक में भी उठाया गया था। उन्होंने कहा कि इनके छोटे-छोटे टेंडर करके टुकड़ों में काम कराया जाता तो कार्य जल्दी हो सकता था। साथ ही इन कार्यों की एक कमेटी बनाकर विशेषज्ञों के साथ जांच की मांग की। समिति अध्यक्ष की बिना एनओसी ठेकेदार को भुगतान नहीं करने का प्रस्ताव लिया गया। अतिरिक्त आयुक्त नरेश मालव ने सभी एक्सईएन को समिति सदस्यों को भी वर्क ऑर्डर की कॉपी देने के निर्देश दिए।