
कोटा.कोरोना (Corona) संक्रमित गंभीर रोगियों के उपचार के लिए प्लाज्मा थैरेपी के लिए प्लाज्मा डोनेट करने की पहल का सोमवार से आगाज हो गया। हृदय रोग विशेष डॉ. साकेत गोयल पहले प्लाÓमा डोनर बने। पहले उनकी कोरोना जांच की गई और रिपोर्ट आने के बाद प्लाÓमा लिया गया। वहीं एमबीएस अस्पताल के ब्लड बैंक में पहुंचे प्लाÓमा डोनर्स का स्वागत कारपेट बिछाकर और पुष्प वर्षा से किया। जिला कलक्टर उज्जवल राठौड़ और ग्रामीण एसपी शरद चौधरी ने डोनर्स का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह पहल मददगार साबित होगी।
हाड़ौती विकास मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र सांखला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने डोनर का पुष्पों से स्वागत किया। सबसे पहले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. साकेत गोयल ने प्लाÓमा डोनेट किया। एमबीएस ब्लड बैंक में आए प्लाÓमा का उपयोग कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के उपचार में होगा। इस अभियान में भागीदार बने एलन परिवार ने भी 4 वैन प्लाÓमा डोनर्स के लिए लगाई है, जो कि मरीजों को घर से लाने व वापस घर छोडऩे का काम कर रही है।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना और एमबीएस अस्पताल अधीक्षक डॉ. नवीन सक्सेना ने अभियान में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में अन्य अतिथियों में पीसीसी सदस्य डॉ. जफर मोहम्मद, सेंट्रल लैब इंचार्ज डॉ. आरके सिंह, डॉ. एचएल मीणा और नयापुरा थाना अधिकारी मुनीन्द्र सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। मोर्चा के शहर अध्यक्ष शादाब खान, विष्णु मेवाड़ा, ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमित वर्मा, साबिर घोस, अजय दरड़ा और राकेश सुमन ने भी सहयोग किया।
अतिसंवेदनशील रोगी जल्दी ठीक हो सकेंगे
कोविड-19 से ठीक हुए रोगियों से प्राप्त प्लाÓमा में वायरस से सुरक्षात्मक एंटीबॉडी होती है। जब इसे शरीर में प्रवेश कराया जाता है तब यह कोविड-19 के रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर सकता है। इसके संभावित लाभ को ध्यान में रखते हुए प्लाÓमा थैरेपी उन रोगियों को प्रदान की जाती है जो पारंपरिक उपचार से ठीक नहीं हो पा रहे हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो कोविड-19 से ठीक हो चुका है और उपचार या होम आइसोलेशन की अवधि पूरा कर चुका है, जिसका वजन 50 किलो से Óयादा है और जिसकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच है, वह अपने प्लाÓमा को दान कर सकता है। उनके द्वारा प्लाÓमा दान करने से पहले, ब्लड बैंक द्वारा रक्तदान के लिए उनकी पात्रता का आकलन किया जाता है और उनके रक्त में कोविड-19 के लिए सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के स्तर की भी जांच की जाती है। एक ठीक हुए व्यक्ति के रक्त में आमतौर पर इस प्रकार के एंटीबॉडी का एक उ'च जमाव होता है और जब इसे एक अतिसंवेदनशील व्यक्ति को दिया जाता है तो ये एंटीबॉडी रक्त में फैल जाती है, उत्तकों तक पहुंचते हैं और वायरस को बेअसर करते हैं।
Published on:
20 Jul 2020 11:53 pm
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