
कोटा .
झालावाड़ के उमेश वाल्मीकि हत्याकांड के आरोपित को जेल अधीक्षक की ओर से चित्तौड़ जेल से पेश नहीं करने पर एससी-एसटी अदालत ने सोमवार को चित्तौडगढ़ एसपी को जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। कोर्ट ने इसे अवहेलना माना है।
उमेश हत्याकांड मामला झालावाड़ से हस्तांतरित होकर कोटा की एससी-एसटी अदालत में आया है। यहां सुनवाई चल रही है। सोमवार को भी फरियादी समेत अन्य गवाहों के बयान होने थे, लेकिन आरोपित नीलम मीणा के चित्तौडग़ढ़ जेल से नहीं आने के कारण बयान नहीं हो सके। अब मंगलवार को सुनवाई होगी।
यह लिखा पत्र
आरोपित को पेश नहीं करने को अदालत ने गम्भीर मानते हुए एसपी चित्तौड़ को पत्र लिखा। इसमें कहा कि उमेश हत्याकांड का निस्तारण 4 माह में करने का हाईकोर्ट का निर्देश है, लेकिन अदालत द्वारा बार-बार आदेश देने के बावजूद जेल अधीक्षक चित्तौडग़ढ़ जाप्ता नहीं होने का नोट लगाकर आरोपित नीलम मीणा को पेश नहीं कर रहे। इससे अदालत की कार्यवाही बाधित हो रही है। जेल अधीक्षक द्वारा जान बूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है। इसलिए उनसे स्पष्टीकरण लिया जाए। साथ ही, निर्देश प्रदान करें कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मंगलवार को आवश्यक रूप से आरोपित को अदालत में पेश करेंं।
झगड़े की आशंका में पकड़े 12 जने
इधर, मामले में दोनों पक्षों की ओर से बड़ी संख्या में लोग अदालत के बाहर एकत्र हो गए। इससे गहमा-गहमी हो गई। आपस में झगड़े की आशंका को देखते हुए नयापुरा पुलिस मौके पर पहुंची। समझाइश के बाद भी अदालत के बाहर से नहीं हटने पर पुलिस दोनों पक्षों के 12 जनों को पकड़कर थाने ले आई। पुलिस ने सभी को शांतिभंग में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
यह था मामला
सूरज वाल्मीकि ने 6 मार्च 2015 को झालावाड़ कोतवाली में रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा था कि उसके चाचा उमेश प्रॉपर्टी का काम करते थे। उन्हें नीलम मीणा, हरिसिंह, करीम, निक्की व राजकुमार धमकी दे रहे थे। उन्होंने जान से मारने की नीयत से उसके चाचा व भाई आकाश पर फायर किए, इसमें उमेश की मौत हो गई। इस पर पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल आरोपित नीलम मीणा चित्तौड़ जेल में बंद है।
Published on:
20 Nov 2017 09:03 pm
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