कोटा. स्थाई लोक अदालत ने कोटा शहर में रोजाना हजारोंं लीटर नकली दूध बिकने व स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस सम्बंध में ठोस कार्रवाई नहीं करने के मामले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोटा को नोटिस जारी कर 20 जून तक जवाब मांगा है।
अधिवक्ता लोकेश कुमार सैनी की ओर से कोर्ट में दी गई जनहित याचिका में बताया कि कोटा शहर में बड़ी मात्रा में नकली दूध बेचा जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने 3 साल में मात्र 125 नमूने लिए हैं। हाल ही में कोटा डेयरी ने 3500 लीटर नकली दूध पकड़ कर उसे नष्ट किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि शहर में रोजाना हजारों लीटर नकली दूध बेचा जा रहा है। लोग इस दूध का उपयोग कर गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। नकली दूध असली के साथ मिलाकर या उसका कोई उत्पाद बेचा जा रहा है। खुले दूध की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं। खुला दूध शहर में 40 से 50 हजार लीटर बिकता है। सिन्थेटिक दूध में साबुन जैन गंध आती है। नकली दूध का स्वाद डिटरजेंट या सोडा मिला होने के कारण कड़वा हो जाता है। सिंथेटिक्स दूध में यूरिया मिलने पर वह गाढ़े पीले रंग का दिखाई देता है। हाथों से रगडऩे पर डिटरजेंट जैसी चिकनाहट महसूस होती है। ऐसा दूध पीने से फूड पॉइजन हो सकता है। किडनी व लीवर पर भी बुरा असर पड़ सकता है। केंसर तक हो सकता है। लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोटा की अनदेखी से समस्या बनी है।