
Created an Movie Avoid for Suicide
भाई...! हिम्मत मत हारो, सब ठीक हो जाएगा। एक बार मेरा कहना मान लो और थोड़ी मेहनत कर लो। मैं तुम्हारी मदद करुंगा...। नोट्स, किताबें उपलब्ध करवाऊंगा। फिर भी यदि सफलता नहीं मिली तो तुम्हारे साथ मैं भी आत्महत्या कर लूंगा। दोस्त ने दोस्त के कहने पर कुछ एेसा ही किया और सफलता हासिल कर ली। वह बेहद खुश था, उसने दोस्त को धन्यवाद दिया।
शहर के चार से पांच युवाओं ने मिलकर बच्चों में पनप रही आत्महत्या की प्रवृत्ति को लेकर फिल्म तैयार की है। फिल्म दस मिनट की है। इस फिल्म ने सैकड़ों एेसे विद्यार्थियों को सीख दी है जो जीवन से हार बैठते हैं और आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लेते हैं। बृजेश, वैभव, रघु व ऋषिराज ने संवाद और अभिनय से विद्यार्थियों को आत्महत्या जैसी प्रव़ृत्ति से बचने का संदेश दिया है। इसमें बताया कि हिम्मत हारने से कुछ नहीं होता। बीते दिनों को भूलाकर मेहनत की जाए तो मंजिल हमेशा मिलती है।
बृजेश व वैभव ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि कोटा के गणेश उद्यान व सिटी मॉल समेत कुछ अन्य स्थानों को फिल्माया गया है। फिल्म के कथानक को लेकर उन्होंने बताया कि एक एेसे विद्यार्थी की कहानी है, जो पढ़ाई के दिनों को मौजमस्ती में काट देता है, लेकिन पिता उसे अपनी उम्मीदें, सपने बताते हैं तो वह खुद पश्चाताप करता है। विचारों की उधेड़बुन में आत्महत्या तक की सोच लेता है। इसी समय दोस्त कमरे का दरवाजा खटखटाता है। वह अपने दोस्त के चेहरे को भांप लेता है, उसे हौंसला देता है।
इसके बाद वह अपना विचार बदल लेता है और मेहनत कर सफलता प्राप्त करता है। फिल्म खुद कोचिंग के विद्यार्थियों ने ही बनाई है। आईआईटी की कोचिंग कर रहे वैभव ने बताया कि फिल्म से पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया।
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
