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BIG NEWS: अपराध की दुनिया में फिर बढ़ा कोटा का खौफ, बड़े खूंखार हैं इन इलाकों के अपराधी, यहां जाने से कतराती है पुलिस

अपराध की दुनिया में बदनाम होकर कोटा शहर भले ही कोचिंग सिटी के रूप में पहचान बना चुका हो, लेकिन यहां अब भी हिस्ट्रीशीटरों की कमी नहीं है।

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कोटा

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Zuber Khan

Jun 11, 2018

Crime in kota

BIG NEWS: अपराध की दुनिया में फिर बढ़ा कोटा का खौफ, बड़े खूंखार हैं इन इलाकों के अपराधी, यहां जाने से कतराती है पुलिस

कोटा. अपराध की दुनिया में बदनाम होकर कोटा शहर भले ही कोचिंग सिटी के रूप में पहचान बना चुका हो, लेकिन यहां अब भी हिस्ट्रीशीटरों की कमी नहीं है। आए दिन बदमाश हत्या, लूट, चोरी-चकारी और फायर जैसी वारदातों को चौड़े-धाड़े अंजाम दे रहे हैं। उनमें पुलिस का कोई खौफ नजर नहीं आता। पूरे प्रदेश की बात करें तो जयपुर-जोधपुर के बाद सर्वाधिक हिस्ट्रीशीटर कोटा संभाग में हैं। संभाग के 5 जिलों में कोटा शहर में इनकी संख्या ग्रामीण से करीब दोगुना है।

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बार-बार और गम्भीर अपराध करने वालों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या को देखते हुए पुलिस की ओर से ऐसे अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोल दी जाती है। एक बार अपराधी की हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद वह कभी बंद नहीं होती। कोटा संभाग में करीब डेढ़ हजार से अधिक हिस्ट्रीशीटर हैं।

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राज्य में कुल 9659 हिस्ट्रीशीटर

प्रदेश में वर्तमान में कुल 9659 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनमें से सर्वाधिक 1895 जयपुर संभाग में और 1559 जोधपुर संभाग में हैं। कोटा संभाग में इनकी संख्या 1534 है। 1444 के साथ उदयपुर चौथे स्थान पर है। सबसे कम 850 हिस्ट्रीशीटर भरतपुर संभाग में हैं।

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कोटा ग्रामीण से शहर में दोगुने
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कोटा संभाग के 5 जिलों में कुल 1534 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनमें से कोटा शहर में इनकी संख्या सर्वाधिक 412 है। यह कोटा ग्रामीण के 206 के मुकाबले दोगुने हैं, जबकि बारां में 285, बूंदी में 293 व झालावाड़ में इनकी संख्या 338 है।

शहर में सर्वाधिक गुमानपुरा में

जहां तक शहर का सवाल है, यहां 17 थानों में से गुमानपुरा थाना क्षेत्र में सर्वाधिक 61 हिस्ट्रीशीटर हैं। दूसरे नम्बर पर 36 के साथ मकबरा थाना और तीसरे नम्बर पर 34 हिस्ट्रीशीटर वाला उद्योग नगर थाना है। शहर में सबसे कम 11-11 जवाहर नगर व आरकेपुरम थाना क्षेत्रों में हैं।

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हिस्ट्रीशीट नहीं निगरानी बंद होती है
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिन अपराधियों की हिस्ट्रीशीट एक बार खुल जाती है, वह कभी बंद नहीं होती। पुलिस ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी भी रखती है, लेकिन हिस्ट्रीशीटर यदि लम्बे समय तक कोई अपराध नहीं करता है तो पुलिस की ओर से उसकी निगरानी जरूर बंद हो जाती है।

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