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कोटा में बंद होंगे डमी स्कूल, कोचिंग संस्थानों पर कसा शिकंजा

कोटा के कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली तय करने के लिए पहले भी गाइड लाइन बनी हैं, लेकिन उनकी पालना कभी नहीं हो पाती। इस बार विधिक संस्था ने नए निर्देश जारी किए हैं। जिसके बाद इनकी पालना की उम्मीद जगी है। इस बार सभी कोचिंग संस्थानों को गाइड लाइन की पालना के लिए शपथ पत्र भी देना होगा।

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Vineet Kumar Singh

May 19, 2017

Dami School will be closed in Kota

Dami School will be closed in Kota

कोटा में चल रहे डमी स्कूल बंद होंगे। कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को फर्जी दाखिला देने वाले इन स्कूलों पर राजस्थान बाल संरक्षण आयोग की निगाह टेढ़ी हो गई है। आयोग ने कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। जिसमें कोचिंग छात्रों को डमी स्कूलों में पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कोचिंग सिटी कोटा में पढऩे आ रहे विद्यार्थियों को मिलने वाली डमी स्कूल की सुविधा को राजस्थान बाल संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है। स्कूली शिक्षा के दौरान कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग संस्थान डमी स्कूल की व्यवस्था कर देते हैं। विद्यार्थी साल भर कोचिंग में पढ़ता है और साल के अंत में स्कूल जाकर वार्षिक परीक्षा दे आता था। आयोग ने कोचिंग संस्थानों के लिए जारी नई गाइडलाइन में चिंता जताते हुए कहा कि डमी स्कूल की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। कोचिंग संस्थानों के लिए तैयार 40 बिन्दुओं की नई गाइड लाइन का शुक्रवार को जिला न्यायाधीश केदारलाल गुप्ता ने विमोचन किया। इस दौरान आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी भी मौजूद रहीं।

गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु

- कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में बोल्ड अक्षरों में अंकित होना चाहिए कि कोचिंग में प्रवेश, उच्च शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश की गारंटी नहीं है।

- पूरे वर्ष की फीस एकमुश्त नहीं लेकर त्रैमासिक आधार पर लेने की व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

- यदि विद्यार्थी कोचिंग से सामंजस्य नहीं बैठा पा रहा और कोचिंग छोडऩा चाहता है तो तीन माह के भीतर फीस वापसी का प्रावधान होना चाहिए।

- संस्थानों की वेबसाइट, विज्ञापन, स्टेशनरी एवं स्टडी मैटेरियल पर बाल आयोग, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नंबर अंकित होने चाहिए।

- प्रत्येक बैच में विद्यार्थियोंं की संख्या 30 से 40 करनी होगी। ताकि सभी पर ध्यान दिया जा सके। शिक्षकों की लगातार ट्रेनिंग व काउंसलिंग होनी चाहिए। संस्थान यह बताएं कि उनके यहां शिक्षकों के चयन का क्या मापदंड है।

- सप्ताह में एक छुट्टी अनिवार्य होनी चाहिए। अभी हर रविवार को टेस्ट एवं बाकी दिन कक्षाएं चलती है। जिससे बच्चे रिलेक्स नहीं हो पाते।

- कोचिंग संस्थानों की एसोसिएशन होनी चाहिए एवं सभी संस्थानों में प्रवेशित बच्चों की सूची एक कॉमन पोर्टल पर होनी चाहिए।

- विद्यार्थियों के अवसाद की पारिवारिक पृष्ठभूमि प्रवेश के समय ही जांची जानी चाहिए।

- संस्थानों में कॅरियर काउंसलर एवं मनोवैज्ञानिक आदि की सेवाएं आवश्यक होंगी। मेडिटेशन व मनोरंजन को मोड्यूल में शामिल करें और उनमें विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अनिवार्य होनी चाहिए।

- लगातार अनुपस्थित विद्यार्थियों के बारे में परिजनों को सूचित करें।

- मेडिकल यूनिट की स्थापना कर विद्यार्थियों को 24 घंटे मेडिकल सुविधा व दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिएं।

- परीक्षा परिणाम आने से दो दिन पहले ही संस्थान विद्यार्थियों को मोटिवेट करें। उन्हें बताएं कि परिणाम अंतिम पड़ाव नहीं है।

- कोचिंग संस्थान व हॉस्टल क्षेत्रों को ड्राई जोन व धूम्रमान निषेध घोषित करें और विद्यार्थियों के निवास क्षेत्र सीसीटीवी निगरानी में हो।

- कोचिंग में प्रवेश के लिए परीक्षा का मापदंड तय हो और एक डेस्क हो जहां विद्यार्थी अपनी परेशानी बता सके।

- सभी संस्थान रजिस्टर्ड विद्यार्थियों के हॉस्टल व मैस का डाटा तैयार करें। इसे प्रवेश फार्म में शामिल किया जाना चाहिए।

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