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सावधान! खौफनाक हो रहा राजस्थान का यह शहर, हर 73 घंटे में होता है जानलेवा हमला

Crime News: राजस्थान के इस शहर में 2017 में 130 घंटे में जानलेवा हमले की वारदात होती थी, वहीं वारदात अब 73 घंटे बीतने से पहले हो रही है।

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कोटा

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Zuber Khan

Oct 24, 2019

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सावधान! खौफनाक हो रहा राजस्थान का यह शहर, हर 73 घंटे में होता है जानलेवा हमला, जरा सी बात और चाकू सीने के पार

कोटा. आए दिन हो रहे जानलेवा हमले के कारण कोटा शहर सहम उठा है। जहां 2017 में शहर में 130 घंटे में जानलेवा हमले की वारदात होती थी, वहीं वारदात अब 73 घंटे बीतने से पहले हो रही है। वह भी तब जबकि कई मामलों में तो पुलिस जानलेवा हमले का प्रकरण दर्ज ही नहीं करती। तीन वर्ष में शहर में जानलेवा हमले के मामलों में डेढ़ गुना से भी अधिक की वृद्धि हुई है।

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कोटा शहर में धारदार हथियारों की खरीद व बेचान पर रोक नहीं लग रही। ऐसे में अपराधियों तक धारदार हथियार आसानी से पहुंच रहे हैं। जिससे अपराधी आए दिन जानलेवा हमले की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस कार्रवाई के अभाव में जानलेवा हमलों व अवैध धारदार हथियारों को रखने का ट्रेड तेजी से बढ़ रहा है।


शोपीस व कमानी से बन रहे हथियार
शहर में वाहनों की टूटी व पुरानी कमानियां अपराधियों को हथियार के लिए खूब रास आ रही है। अपराधी कमानी से आसानी से हथियार बनवा रहे हैं, लेकिन पुलिस केवल अपराधियों से हथियार बरामद करने तक ही सीमित है। ऐसे में हथियार आसानी से मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा। इसके अलावा शोपीस हथियारों को भी धार लगाकर भी तैयार किए जा रहे हैं।

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कमजोर पुलिस कार्रवाई, पनपा रही रंजिशें
शहर में जानलेवा हमलों से लेकर हत्याओं के मामले में पुरानी रंजिश मुख्य वजह उभर कर आई है। ऐसे में अपराधियों को दंड न मिलना, आरोपी व पीडि़त पर एक समान शांतिभंग की कार्रवाई भी मुख्य कारण बन कर उभरा है। कमजोर पुलिस कार्रवाई पुरानी रंजिशों को पनपाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। ऐसे में तुरंत व प्रभावी जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दरकार है।

धार करने व हथियार बनाने वालों पर कार्रवाई का टोटा
शहर में कुछ वर्षों पूर्व पुलिस ने अवैध धारदार हथियारों के साथ इन्हें बेचने व बनाने वालों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई की थी। जिससे शहर में जानलेवा हमलों व चाकूबाजी का ट्रेड एकदम नीचे आ गया था। जानलेवा हमलों का आंकड़ा भी कम हो गया था। लेकिन इसके बाद अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई महज औपचारिक बनकर रह गई। पुलिस अवैध हथियार रखने वालों को तो पकड़ रही है, लेकिन इसे बनाने व बेचने वालों के खिलाफ अंगुलियों पर गिनती जितनी ही कार्रवाई हो रही है। ऐसे में धारदार हथियारों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही।

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