
कोटा.
रक्तदान-नेत्रदान के लिए अथक प्रयासों से अब लोग जागरूक होने लगे हैं। कोटा में एक बार पहल होने के बाद कारवां जुड़ता चला जाता है। राजस्थान में कोटा रक्तदान के मामले में अग्रणी है, वहीं नेत्रदान भी अब सहजता से होने लगे हैं। इन प्रयासों के बाद भी कोटा देहदान में काफी पीछे है। शहर में एक बार फिर देहदान के लिए लोगों को जागरूक करने का बीड़ा लॉयंस क्लब नॉर्थ ने उठाया है।
सालों से दादाबाड़ी तीन बत्ती सर्किल के पास वीरान पड़े देहदान पार्क को अब शहर ही नहीं देश के प्रमुख पार्कों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास शुरू होगा। इसके लिए इस पार्क में फुलवारी से दिल, किडनी व आंख सहित शरीर की विभिन्न रचनाएं बनाई जाएंगी। इसकी दीवारें भी देहदान का संदेश देंगी। नगर निगम ने पार्क को 22 दिसम्बर 2017 को क्लब के सुपुर्द कर दिया। पार्क में शीघ्र ही कार्य प्रारंभ होगा। अभी लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं कि शहर में लोगों को देहदान के प्रति कैसे जागरूक किया जाए।
इस तरह का होगा पार्क
लॉयन्स क्लब के प्रोजेक्ट चेयरमैन वरुण रस्सेवट ने बताया कि इस पार्क में देहदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दीवारों पर संदेश लिखे जाएंगे। कलाकार पेंटिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे, फुलवारी से दिल, किडनी, आंख, शरीर की विभिन्न रचनाएं बनाई जाएंगी। सर्वधर्म समभाव, देहदान करने वालों के नाम व फोटो भी यहां लगाए जाएंगे।
उन्होंने ने कहा कि इस पार्क को देश के संदेशपरक पार्कों की श्रेणी में प्रमुख स्थान मिले ऐसा प्रयास होगा। क्लब अध्यक्ष हितेश्वर राव ने कहा कि ऐसा विचार किया जा रहा है कि पेड़ पौधे भी देहदान का संदेश दें, साथ ही घास की कटिंग को भी संदेशपरक बनाए जाने की कोशिश होगी। सचिव नितिन भण्डारी ने बताया कि आमजन इससे जुड़े इसको लेकर भी यहां कई कार्यक्रम आयोजित होंगे।
कोटा में देहदान की ये है स्थिति
एनोटॉमी (शरीर रचना) विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि कोटा में पहला देहदान वर्ष 2010 में रामपुरा के ज्ञानचंद चौरडिय़ा का हुआ था। उसके बाद अब तक केवल 19 ही देहदान किए गए हैं। वर्ष 2017 में केवल दो ही लोगों ने देहदान की है, जिसमें विज्ञान नगर निवासी एन.के पारेकल और एक लावरिस की बॉडी विभाग को मिली है। जबकि प्रतिवर्ष करीब 15 देह की आवश्यकता स्टूडेंट के लिए होती है। कोटा मेडिकल कॉलेज के 150 स्टूडेंट बॉडी पर स्टेडी करते हैं। देहदान करने के 250 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, उसके बाद भी भ्रांतियों के चलते देहदान बहुत कम हो रहा है।
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Updated on:
30 Jan 2018 02:53 pm
Published on:
30 Jan 2018 02:52 pm
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