
Dinosaurs were also present in Hadawati, found in the 75 thousand year old style papers
कोटा. राजस्थान में पहली बार डायनासोर की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं। पुरातत्ववेत्ताओं ने रावतभाटा के पास श्रीपुरा गांव में 75 हजार साल से भी ज्यादा पुराना उत्कीर्ण शैली में बना डायनासोर का शैलचित्र खोज निकाला है। यह शैलचित्र सैरोपोडा श्रेणी के ओपिस्टोकोलिकाडिया स्कार्ज़िन्स्की डायनासोर से बहुत ज्यादा मिलता है। इस गांव में इस शैली के तीन दर्जन से ज्यादा शैलचित्र मौजूद हैं, लेकिन डायनासोर का शैलचित्र इन सभी के केंद्र में स्थापित है।
हाड़ौती में शैलचित्रों की अकूत संपदा मौजूद है। जिसे वैश्विक मंच पर लाने के लिए कोटा का महर्षि कर्णव इतिहास शोध संस्थान के निदेशक और प्रख्यात इतिहासकार प्रो. जगत नारायण शैलचित्र खोज परियोजना चला रहे हैं। इस परियोजना से जुड़े महाराणा प्रताप महाविद्यालय रावतभाटा के प्राचार्य डॉ. तेजसिंह पिछले डेढ़ दशक से शैलचित्रों की खोज में जुटे हैं। हाल ही में उन्होंने रावतभाटा से करीब 17 किमी दूर स्थित श्रीपुरा गांव में उत्कीर्ण शैली के शैलचित्रों की बड़ी शृंखला खोज निकाली। डॉ.तेज सिंह बताते हैं कि करीब दो दर्जन शैलचित्रों के केंद्र में डायनासोर का उत्कीर्ण शैली का शैलचित्र मिला है, जो 75 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। यह शैल चित्र बामनी नदी के किनारे मौजूद शिलाखंडों पर धारदार चीज से बेहद बारीकी से उत्र्कीण किए गए हैं। यह शैलचित्र प्राचीनतम शैलचित्रों में से एक हैं। इस खोज में स्थानीय संदीप जैन, मिश्रीलाल और अमित जैन का भी सहयोग रहा।
24 सेंटीमीटर लंबा शैलचित्र
प्रो. जगत नारायण ने बताया कि डायनासोर का शैलचित्र 24 सेंटीमीटर लंबा है। जिसमें लंबी गर्दन, ऊंचा उठा हुआ सिर और घुमावदार ऊंची पूंछ का चित्रांकन है। पिछले पैरों के क्रम और उनकी चौड़ाई से पता चलता है कि यह चलते हुए डायनासोर का शैलचित्र है। उन्होंने बताया शिलाखंड पर डायनासोर, मनुष्य के साथ-साथ विभिन्न आकृतियों के दो दर्जन से ज्यादा शैलचित्र मिले हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार डायनासोर के उत्कीर्ण शैली के शैलचित्र की खोज हुई है।
शाकाहारी डायनासोर
नेचुरलिस्ट विकास श्रीवास्तव बताते हैं कि यह शैलचित्र क्रेटेसियस काल के सैरोपोड डायनासोर के जीनस ओपिस्टोकोलिकाडिया स्कार्ज़िन्स्की डायनासोर से बेहद मिलता जुलता है। इस श्रेणी के डायनासोर शाकाहारी होते थे और विकास के क्रम में धीरे-धीरे इनके आगे के पैर छोटे होते गए। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि श्रीपुरा में मिले शैलचित्र की आगे की टांगें लंबी हैं। जिससे पता चलता है कि यह शुरुआती पीढ़ी का डायनासोर रहा होगा। डायनासोर का शैलचित्र मिलने से इस बात को बल मिलता है, इस इलाके में डायनासोर मौजूद रहे होंगे। आदिमानव ने डायनोसोर देखकर शैलचित्र तैयार किए होंगे।
Published on:
17 Sept 2018 08:00 am
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
