
बदलाव: इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्राचार्यों का डायरेक्ट सलेक्शन होगा खत्म
कोटा. शैक्षणिक योग्यता को दरकिनार कर गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किए गए 'खास शिक्षकोंÓ को पद से हटाने के बाद प्रदेश सरकार अब उनके कार्यकाल की जांच कराने में जुट गई है। इतना ही नहीं प्राचार्य के पद पर डायरेक्ट सलेक्शन खत्म कर अब शैक्षणिक प्रदर्शन सूचकांक (एपीआई) के आधार पर चयन किया जाएगा।
गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब प्राचार्यों की नियुक्ति डायरेक्ट सलेक्शन के जरिए नहीं होगी। आचार संहिता लागू होने से पहले ही प्रदेश सरकार नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर चुकी है। नए बदलाव के मुताबिक प्राचार्य की तैनाती अब सिर्फ साक्षात्कार के जरिए नहीं हो सकेगी। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने बताया कि नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए अब एपीआई और कार्य अनुभव के आधार पर वरिष्ठता सूची बनाई जाएगी।
इसकी मैरिट के आधार पर शिक्षकों को प्राचार्य नियुक्त किया जाएगा। यदि एक से ज्यादा व्यक्तियों की मैरिट लगभग समान होगी तो उसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ओपन इंटरव्यू आयोजित कराएगा। इसमें इंटरव्यू बोर्ड सभी आवेदकों का एक दूसरे के सामने ही साक्षात्कार लेकर मैरिट घोषित करेगा। इस स्थिति में भी साक्षात्कार को 100 में से अधिकतम 10 अंकों का वेटेज ही दिया जाएगा।
कार्यकाल की होगी जांच
डॉ. गर्ग ने बताया कि शैक्षणिक योग्यता एवं वरिष्ठता को दरकिनार कर पिछली सरकार ने प्रदेश के सात राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के प्राचार्य का कार्यभार 'खास शिक्षकोंÓ को सौंप दिया था। आलम यह था कि महज पांच साल की नौकरी करने वाले शिक्षकों तक को प्रोफेसर के समकक्ष माने जाने वाले प्राचार्य के पद पर बैठा दिया गया।
सालों तक स्थाई प्राचार्य की नियुक्तियां किए बगैर डायरेक्ट सलेक्शन के जरिए चुने गए इन प्रभारी प्राचार्यों के कार्याकाल में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमित्ताओं की शिकायत तकनीकी शिक्षा मंत्रालय तक पहुंची तो मार्च में इन सभी को पद से हटाकर कॉलेज के वरिष्ठतम शिक्षकों को कार्यभार सौंपने के आदेश जारी कर दिए। विभाग ने अब इनके कार्यकाल के दौरान लिए गए वित्तीय एवं प्रशासनिक फैसलों की जांच के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
Published on:
09 Apr 2019 06:00 am
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