
Dispute on amrut scheme Celebration in kota
अमृत योजना और स्मार्ट सिटी की दूसरी वर्षगांठ पर रविवार को नगर निगम की ओर से दशहरा मैदान में चार पार्कों का शिलान्यास व सिटी वाइड एप और एलईडी स्ट्रीट लाइट्स का लोकार्पण किया गया।
सरकार के निर्देश पर निगम ने कार्यक्रम तो आयोजित किया, लेकिन तैयारी करना भूल गए। आलम यह था कि आम लोगों की जगह समारोह में सिर्फ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं ही मौजूद रहीं। यह महिलाएं भी राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत सहायता राशि के चेक लेने के लिए कार्यक्रम में आई थी। कार्यक्रम इतनी हड़बड़ी में आयोजित किया गया था कि नगर निगम के अधिकारी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के उपाध्यक्ष को ही बुलाना भूल गए।
मेरा अपमान है, इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा
कार्यक्रम में आमंत्रित ना किए जाने के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के वाइस चेयरमैन एवं न्यास अध्यक्ष रामकुमार मेहता इस कदर आक्रोषित थे कि वह कार्यक्रम के बीच अचानक मंच पर पहुंच गए और सार्वजनिक रूप से निगम आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल व महापौर महेश विजय को खरी-खरी सुनाई। मेहता ने डॉ. जिंदल से कहा कि यह स्मार्ट सिटी का कार्यक्रम है। मैं इस प्रोजेक्ट का वाइस प्रेसीडेंट हूं, मुझे नहीं बुलाना मेरा अपमान है और मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा। निगम का कार्यक्रम होता और मुझे नहीं बुलाया जाता तो कोई बात नहीं थी, लेकिन इस प्रोजेक्ट में न्यास भी शामिल है। उनके साथ-साथ न्यास अधिकारियों को भी नहीं बुलाया गया।
सफाई देने पर भी नहीं बनी बात
मेहता की नाराजगी पर निगम आयुक्त डॉ. जिंदल ने सफाई देते हुए कहा कि भूलवश एेसा हो गया। आगे से पूरा ध्यान रखा जाएगा, लेकिन इसके बावजूद मेहता का गुस्सा ठंडा नहीं पड़ा और उन्होंने जिंदल से कहा कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। मेहता ने कहा कि उन्हें वाहवाही लूटने का कोई लोभ नहीं है, लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।
महापौर खुद ही झपटना चाहते हैं अमृत कलश
कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने को लेकर हुए विवाद के बीच विधायक भवानी सिंह राजावत मंच से ही चुटकी लेने लगे। उन्होंने कहा 'अमृत योजना वास्तव में लोगों के लिए अमृत जैसी है, लेकिन मेहता जी की बात सुनकर लगता है, महापौर अकेले इस अमृत कलश को झपटना चाहते हैं। एेसा मत करो, इस कलश पर न्यास अध्यक्ष का भी हक है।'
Published on:
25 Jun 2017 07:38 pm
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