
कोटा मेडिकल कॉलेज में पढ़े, प्यार किया परिणय सूत्र में बंधे और कॅरियर बनाया, आज खुशहाल जीवन यापन कर रहे हैं। एेसे तीन डॉक्टर दम्पती भी रजत जयंती समारोह में आए हैं। इन तीनों दम्पतियों ने अपनी कुछ यादें राजस्थान पत्रिका से शेयर की, उसके कुछ अंश....

पढ़ाई के साथ ही लड़ी आंखें डॉ. अनिल यादव-डॉ.अंजली कोटा मेडिकल कॉलेज में वर्ष 1995 से 2001 तक एक साथ मेडिकल की तैयारी की। तैयारी करते-करते ही आंखें लड़ गई, लेकिन कॅरियर सामने चुनौती बनकर खड़ा था। वर्ष 2003 में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी की। आज दोनों एक साथ यूपी में स्वयं का निजी हॉस्पिटल चला रहे हैं। कोटा अब पहले से काफ ी बेहतर हो गया है। सड़कें चौड़ी हो गई हैं। यहां कचौरी को हम बहुत मिस करते हैं।

अमित बहुत शरारती था, फिर भी प्यार हो गया डॉ. अमित अग्रवाल-डॉ. अनिता शर्मा कोटा में पढ़ाई के दौरान ही आंखें चार हो गई थी। अमित क्लास में सबसे ज्यादा शैतानी करता। साथ-साथ तैयारी करते हुए एक-दूसरे को कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला। एक दिन अचानक अमित ने प्रपोज कर दिया। हम दोनों ने मेडिकल की तैयारी पूरी होने के बाद 2003 में शादी कर ली। कॉलेज की बीते दिनों की यादों को कभी नहीं भूल सकते है। आज दोनों ऋ षिकेश में रहकर सुखद जीवन जी रहे हैं।

सौभाग्य कि यहां पढ़े डॉ. एसएन गौतम-डॉ. भावना गौतम हमारा सौभाग्य रहा कि हम मेडिकल कॉलेज का हिस्सा रहे। अगर यहां पढ़ाई नहीं की होती तो मुझे कभी भावना नहीं मिलती। मेडिकल की तैयारी के दौरान भावना को मैं पंसद करने लग गया। कई बार प्रपोज करने की कोशिश की, लेकिन मन मैं डरता। एक दिन हिम्मत करके सूचना केन्द्र में आयोजित मेडिकोज मीट में मिले। प्रपोज करदिया। भावना ने भी यस कर दी। आज मैं एमबीएस अस्पताल कोटा में न्यूरो सर्जन हूं और भावना सरकारी नौकरी को छोड़कर स्वयं का हॉस्पिटल कोटा में ही संचालित कर रही हैं।

आखिर मिल गए मनील डॉ. मनील- डॉ. रितिका कॉलेज में पढ़ाई के साथ ही प्यार हो गया। सबसे पहले मनील ने प्रपोज किया। मैने तुरंत यस कर दी, लेकिन हमने कॅरियर बनाने की सोची। पढ़ाई के बाद मनील नैवी में चले गए और मैं आर्मी में, लेकिन भाग्य को और ही मंजूर था। बाद में दोनों ने साथ में मेडिकल की पढ़ाई की और दोनों का डॉक्टर में चयन हो गया। २५ साल के बाद कोटा काफी बदल गया।