
एसटीपी प्लांट लगने से 5 प्रतिशत ही पानी का शोधन, गिर रहे गंदे नाले चंबल के लिए घातक
कोटा. कोटा शहर में चंबल नदी में अब भी गंदे नालों का पानी गिर रहा है। इससे चंबल दूषित हो रही है। गंदे नालों को चंबल में जाने से रोकने के लिए एसटीपी प्लांट लगाया गया था, लेकिन वह पूरी तरह से कार्य भी नहीं कर रहा है। शहर के गंदे नालों का पानी चंबल में गिरने से रोकने के लिए पीपुल फ ॉर एनीमल्स नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अवमानना की कार्यवाही करेगा।
अवमानना याचिका दायर करने से पहले पीपुल फ ॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने बृजेश विजयवर्गीय, वि_ल कुमार सनाढ्य व गौरव सोनी के साथ जाकर रविवार को कोटा शहर में चंबल में गिर रहे गंदे नालों का अवलोकन किया।
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पत्रकारों से बातचीत में जाजू ने बताया कि 150 करोड़ का एसटीपी प्लांट लगने के बावजूद 5 से 10 प्रतिशत ही पानी का शोधन हो रहा है, बाकी सीधे नदी में जा रहा है। इसमें कोटा जिला प्रशासन की घोर लापरवाही नजर आ रही है। नालों का गंदा पानी जाने से चंबल के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। जलीय जीवों पर बुरा असर पड़ रहा है। नदी में अनेक जगह पॉलिथिन, डिस्पोजेबल व गंदगी जमा है। आश्चर्य है कि एनजीटी के निर्देशों के बाद भी चंबल में जाने वाले गंदे नालों की संख्या पहले से बढ़ी है। साजीदेहड़ा, शिवपुरा, सकतपुरा, दोस्तपुरा, रंगपुर, बालिता सहित अन्य स्थानों से गंदे पानी के नाले गिर रहे है। यहां तक कि कोटा थर्मल पावर प्लांट से चंबल नदी में पानी को ठंडा करके फि र छोडऩे का नियम है, लेकिन गर्म पानी छोड़ा जाता है। चंबल को एकमात्र घडिय़ाल सेंचुरी घोषित किया गया था, परंतु अफ सोसजनक बात यह है कि अब एक भी घडिय़ाल नहीं बचा है। कोटा प्रशासन ने चम्बल नदी पर ध्यान नहीं दिया है। इसलिए अवमानना याचिका प्रस्तुत कर गंदे नालों को रोकने का प्रयास करेंगे।
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को कर दिया बर्बाद
जाजू ने कहा कि सरकार ने बूंदी में तीन माह पहले रामगढ़ विषधारी अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व की घोषणा की है, लेकिन इसके गजट नोटिफिकेशन व बजट की कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि सरकार प्रदेश में पांचवा टाइगर प्रोजेक्ट बनाती है तो 1900 वर्ग किमी का कुंभलगढ़ का एरिया सबसे मुफीद है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व अभ्यारण्य 2013 में घोषित हुआ। यहां चार बाघ व तीन बाघिन थे, लेकिन मुकुंदरा को आबाद होने से पहले अधिकारियों ने उसे बर्बाद कर दिया। अब एक बाघिन ही बची है। जो बाघ-बाघिन मर चुके है। उसका जिम्मेदार कौन है। उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई और न कोई कार्रवाई की गई। प्रदेश में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
Published on:
28 Mar 2022 12:51 pm
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