
सम्बलन अभियान में निरीक्षण करते अधिकारी
सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन कमजोर इच्छशक्ति के चलते ये प्रयास रंग नहीं ला रहे। सरकारी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहे, इसके लिए शिक्षा निदेशालय समय-समय पर नवाचार करता है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे भी खूब किए जाते हैं। दावे में कितनी सच्चाई है, यह सम्बलन अभियान में देखने को मिला। राज्य सरकार ने सरकारी विद्यालयों में शैक्षिण स्तर जांचने के लिए बुधवार से शिक्षा सम्बलन अभियान चलाया, जो 6 अक्टूबर तक जारी रहेगा। अभियान के पहले दिन निरीक्षण में बच्चों का शैक्षिक स्तर काफी कमजोर मिला।
गिनती भी नहीं आती बच्चों को
डीईओ प्रारंभिक रामू मीणा ने बताया कि राउप्रावि बेसिक मॉडल रामतलाई का निरीक्षण किया। यहां 106 बच्चों का नामांकन है, जिसमें से 70 छात्र उपस्थित मिले। कक्षा तीन के छात्रों को गिनती, पहाड़े, जोड़-बाकी व गुणा-भाग नहीं कर सके। 5वीं का स्तर भी कमजोर मिला। हिन्दी की पुस्तक पढ़ाई, कुछ पढ़ पाए, कुछ नहीं पढ़ सके। प्रधानाध्यापक को शैक्षिक स्तर सुधारने तथा कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
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इधर, 161 स्कूलों का किया चयन
सरकारी स्कूलों में बच्चों का शैक्षिक स्तर जांचने के लिए एनसीईआरटी की ओर से 13 नवम्बर को नेशनल अचीवमेंट सर्वे के माध्यम से परीक्षा ली जाएगी। इसके लिए जिले के 161 प्राथमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों का चयन किया गया है। इसमें कक्षा 3, 5 व 8वीं के छात्रों की परीक्षा ली जाएगी, जिसमें न्यूनतम 5 व अधिकतम 30 विद्यार्थियों को बिठाया जाएगा। छात्रों के लिए आधार कार्ड की अनीवार्यता रखी गई है। परीक्षा से सरकारी शिक्षकों को अलग रखा गया और वीक्षक के रूप में 350 बीएड, एसटीसी करने वाले छात्र अध्यापकों को लगाया जाएगा। इसके आयोजन के लिए डाइट को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामान्य मिली स्थिति
शैक्षिक प्रकोष्ठ अधिकारी देवलाल गोचर ने बताया कि उन्होंने नयापुरा स्थित मोंटेसरी स्कूल का निरीक्षण किया। जहां नामांकन 522 में से 323 विद्यार्थी मिले। कक्षा 5 व 8वीं की गणित व विज्ञान का स्तर जांचा, जिसमें बालकों की स्थिति सामान्य पाई गई। प्रधानाध्यापक को साप्ताहिक टेस्ट लेने के निर्देश दिए हैं।
Published on:
05 Oct 2017 02:35 pm
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