कोटा. ख्यात गेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. राजेश उपाध्याय ने बताया किएसिडिटी को कम करने की दवा का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। लोग कैमिस्ट के पास जाकर खाली पेट खाने वाली गैस की गोली मांगते है और केमिस्ट जिसको भी पेट की कोई भी परेशानी होती है तो उसको गैस की गोली दे देते है। गोली से एक बार तो फायदा होता है, लेकिन मरीज उसे सालों-साल खाते रहते है। यह अब देखा व समझा गया कि इन गोलियों के लंबे समय तक इस्तेमाल से शरीर में कुछ परेशानियां जैसे पेट, फेफड़े के इन्फेक्शन, आंतों में डायरिया हो जाता है।
उन्होंने बताया कि यह भी देखा गया है कि कुछ चीजे कैल्शियम, विटामिन बी-12 व मैग्निशियम की कमी होती है। कैिल्शियम की कमी होगी तो हड्डी कमजोर होकर उनमें फैक्चर होने का भी डर रहता है। हार्ट अटैक के कुछ लोग खून पतला कम करने की दवा लेते है। अब यह एसिड कम करने की गोली लेने पर यह उन दवाइयों को इन्टरेक्ट करती है, जो एक ही एंजायमेटिक पार्ट में से गुजरना होता है। उससे उन दवाइयों के असर को कम कर सकती है। जिसके चलते हार्ट वाले मरीज को नुकसान हो सकता है। इन बातों को भी ख्याल रखना होता है।
उन्होंने बताया कि इन दवाइयों से किडनी पर भी असर पड़ सकता है और लंबे समय के बाद किडनी खराबी होने के चांस हो जाते है। दिमाग पर भी असर पड़ सकता है। जिसमें आदमी भूलने की क्षमता बढ़ जाती है। जिसे हम डिमेनशिया व एलजाइमर डिजिज कहते है। चिकित्सकों के लिए यह जरूरी है कि वे मरीज को इस तरह की दवाइयां ज्यादा समय तक सेवन करने के लिए नहीं दें।