
लहसुन खरीद: नैफेड की चाल में ऐसे फंसे किसान, करवा बैठे 38 लाख का नुकसान
कोटा . बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत नैफेड ने इस साल भले ही 57 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा कर 3257 रुपए प्रति क्विंटल में लहसुन की खरीद की। लेकिन नैफेड की खरीद एजेंसी राजफेड द्वारा किसानों से प्रति क्विंटल लहसुन दो कट्टों में भरकर लिया जा रहा है। जिनकी लागत 50 रुपए आ रही है। जिसका राजफेड द्वारा किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा।
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राजफेड द्वारा मैसेज मिलने के बाद किसान कट्टों में भरे लहसुन को खरीद केंद्र पर बेचने पहुंचता है। जहां खरीद केंद्र प्रभारी किसान के कट्टों में 50 किलो लहसुन भर कर सिलाई कर देता है। किसान को सिर्फ तुलाई किए लहसुन के दाम की पर्ची सौंप दी जाती है। उसमें किसान द्वारा खरीदे कट्टों का दाम अंकित नहीं किया जाता। जबकि किसान को एक कट्टा खरीदने में 25 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
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कोटा भामाशाह मंडी स्थित खरीद केंद्र पर लहसुन बेचने पहुंचे कोटड़ादीपसिंह के किसान राधेश्याम जांगिड़, बंशीलाल आदि ने बताया कि कट्टे खरीद कर वे लहसुन भरकर बेचने आए।
यहां कट्टे के रुपए मांगे तो खरीद केंद्र द्वारा लहसुन के नमूने निरस्त करने का दबाव बनाया। ऐसे में उन्होंने 25 रुपए कट्टे का नुकसान उठाकर 80 कट्टे लहसुन बेचने पर मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें 2000 रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
ऐसे लगी चपत
हाड़ौती में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 12 खरीद केंद्र संचालित हैं। जहां पर अब तक 75 हजार क्विंटल लहसुन की खरीद हो चुकी। यह लहसुन डेढ़ लाख कट्टों में भरा गया है। जो किसानों द्वारा 25 रुपए प्रति कट्टे के दाम में खरीदे गए हैं। ऐसे में राजफेड द्वारा भरे गए लहसुन के कट्टों की लागत 38 लाख रुपए आती है। जिनका किसानों को भुगतान नहीं किया गया।
किसान के बारदाने में ही लहसुन की तुलाई की जा रही है। जिसके भुगतान का हमें कोई आदेश नहीं मिला है।
नरेश शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफेड
Published on:
25 May 2018 12:35 pm
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