केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार (नाम) योजना के बारे में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। पहले चरण में देश की 21 मंडियों में यह योजना शुरू होगी। दूसरे चरण में सितम्बर 2016 तक 200 मंडियों को जोड़ा जाएगा। इसमें कोटा की भामाशाहमंडी भी शामिल होना प्रस्तावित है। ई-नाम योजना में 23 उत्पादों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय कृषि बाजार का लक्ष्य है कि पूरा देश एक मंडी क्षेत्र बनाना है।
जिसमें किसी भी स्थान से दूसरे स्थान के लिए कृषि उत्पादों की आवाजाही तथा विपणन आसानी से से कम समय में हो सके। इसका सीधा लाभ किसानों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को मिलेगा।
एकल लाइसेंस होगा
राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना में व्यापारियों को भी एकल लाइसेंस ही लेना पड़ेगा। एक लाइसेंस से किसी भी जगह जिन्सों की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे। अभी तक अलग-अलग मंडियों में कारोबार करने के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेना पड़ता है।
एेसे तय होंगे दाम
किसान कृषि जिन्स का सैम्पल मंडी में लेकर आएगा। इस सैम्पल का मंडी समिति प्रशासन ग्रेडिंग करेगा और लेबोरेट्री टेस्ट भी करवाएगा। इसकी रिपोर्ट में बताया जाएगा कि नमी कितनी है, दाने का आकार कैसा है, ऑयल की कितनी मात्रा है। यह रिपोर्ट किसान के नाम, पते समेत ई-नाम पोर्टल पर लोड की जाएगी। किसान किस दाम पर बेचना चाहता है, यह भी अंकित हो जाएगा। ई-नाम पोर्टल पर देशभर के व्यापारी दाम लगाएंगे। इसके बाद माल की डिलीवरी दी जाएगी। खुली बोली होने से किसानों को अधिक दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
रामगंजमंडी को ई-नाम पोर्टल से जोडऩे की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। ई-नाम योजना किसानों व व्यापारियों के लिए लाभकारी होगी।टी.आर. मीणा, क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक कृषि विपणन विभाग